न्यूट्रास्यूटिकल प्रोडक्ट से हो सकती है मोटी कमाई, एक्सपर्ट से जानिए इंडस्ट्री की ताकत

ByCrank10

August 19, 2025


Nutracutical उद्योग: आज के जमाने में लोगों के लिए स्वस्थ रहना और पौष्टिक भोजन मिलना बेहद जरूरी हो गया है. स्वास्थ्य और पोषण का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है. बदलती जीवनशैली, तनावपूर्ण दिनचर्या और असंतुलित आहार ने लोगों को वैकल्पिक स्वास्थ्य समाधान खोजने पर मजबूर किया है. ऐसे समय में न्यूट्रास्यूटिकल्स ने स्वास्थ्य उद्योग में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है. यह सिर्फ डायटरी सप्लीमेंट्स नहीं हैं, बल्कि प्रीवेंटिव हेल्थकेयर का आधार भी बन चुके हैं. आज स्थिति ऐसी बन गई है कि भारत सहित दुनिया भर में यह उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और लोग इसमें अपना भविष्य तलाश रहे हैं. न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट न केवल आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, बल्कि इससे आपको मोटी कमाई हो सकती है. इससे आपको रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं. आइए, जानते हैं कि इसके बारे में एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

भारत में तेजी से बढ़ रहा न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट

अमेरिका की दवा निर्माता कंपनी एल्कोमैक्स जीबीएन फार्मा ग्रुप के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ संजय अग्रवाल के अनुसार, वैश्विक न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट का आकार 2023 में लगभग 480 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का था और 2030 तक इसके 800 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं, भारत में भी यह उद्योग सालाना 20% से अधिक सीएजीआर की दर से बढ़ रहा है.

न्यूट्रास्यूटिकल्स क्या हैं?

न्यूट्रास्यूटिकल्स शब्द न्यूट्रिशन और फार्मास्युटिकल से मिलकर बना है. इनका उद्देश्य भोजन और दवा के बीच की दूरी को कम करना है. इसे कई कैटेगरी में बांटा गया है, जिसमें डायटरी सप्लीमेंट्स, फ़ंक्शनल फूड्स, मेडिकल फूड्स और प्रोबायोटिक्स, हर्बल और बॉटनिकल उत्पाद और प्रीबायोटिक्स आदि शामिल हैं.

  • डायटरी सप्लीमेंट्स: इसमें मल्टीविटामिन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कैल्शियम टैबलेट को शामिल किया गया है. ये पोषण की कमी को पूरा करने के बाद शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं.
  • फ़ंक्शनल फूड्स: इसमें ऐसे खाद्य पदार्थ को शामिल किया है, जिनमें अतिरिक्त पोषण या बायोएक्टिव कंपोनेंट मिलाए गए हों. इनमें प्रोबायोटिक दही और विटामिन-फोर्टिफाइड जूस को शामिल किया है.
  • हर्बल और बॉटनिकल उत्पाद: इसमें प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों से बने उत्पाद अश्वगंधा, तुलसी और ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट को शामिल किया है.
  • मेडिकल फूड्स: मेडिकल फूड्स खास तौर पर रोगियों के लिए बनाए गए हैं. ये डायबिटीज के रोगियों के लिए लो-ग्लाइसेमिक प्रोडक्ट्स के तौर पर काम करते हैं. 0
  • प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स: ये आम तौर पर आंतों और खासकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने वाले प्रोडक्ट होते हैं.

भारत में न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग का विकास

भारत पारंपरिक रूप से आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचारों की धरोहर रहा है. यही कारण है कि भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है. 2025 तक भारत का न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग 18 बिलियन डॉलर से अधिक पहुंचने की संभावना है. शहरी आबादी, फिटनेस-फोकस्ड युवा, और मध्यम वर्ग की स्वास्थ्य जागरूकता ने मांग को बढ़ाया है. एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) द्वारा नियमों का निर्माण और “मेक इन इंडिया” पहल इस सेक्टर को मजबूत बना रही है.

भारतीय यूजर्स की बदलती प्राथमिकताएं

अब लोग बीमार होने के बाद इलाज पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि पहले से स्वस्थ रहना चाहते हैं. यही वजह है कि भारत में वेगन और हर्बल न्यूट्रास्यूटिकल्स की लोकप्रियता बढ़ रही है. ई-कॉमर्स और हेल्थ ऐप्स ने इन उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचा दिया है.

कहां खड़ी है दुनिया

दुनिया भर में न्यूट्रास्यूटिकल्स का बाजार तेजी से फैल रहा है. अमेरिका इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है. यहां विटामिन और डायटरी सप्लीमेंट्स की मांग सबसे अधिक है. यूरोप में प्रोबायोटिक्स और फंक्शनल फूड्स की लोकप्रियता अधिक है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन, जापान और भारत में इसका बाजार सबसे तेजी के साथ बढ़ रहा है. मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशा में इसका बाजार तेजी से उभर रहा है, जहां हेल्थ सप्लीमेंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है.

न्यूट्रास्यूटिकल्स के फायदे

  • बीमारियों की रोकथाम: हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापा जैसी बीमारियों से बचाव करने में सहायक साबित हो रहा है.
  • मानसिक स्वास्थ्य: ओमेगा-3 और विटामिन सप्लीमेंट्स से डिप्रेशन और तनाव में राहत प्रदान करता है.
  • इम्यून सिस्टम मजबूत करना: कोविड-19 के बाद से लोगों ने इम्यूनिटी बूस्टर सप्लीमेंट्स पर भरोसा बढ़ाया.
  • एथलेटिक परफॉरमेंस: स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, प्रोटीन सप्लीमेंट्स और एनर्जी ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ी है.

न्यूट्रास्यूटिकल्स उद्योग की चुनौतियां

हालांकि, भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसके सामने कई चुनौतियां भी हैं.

  • रेगुलेटरी क्लैरिटी की कमी: हर देश के अलग नियम उद्योग के लिए बाधा बनते हैं.
  • क्वालिटी कंट्रोल: नकली और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद उपभोक्ताओं का भरोसा तोड़ते हैं.
  • जागरूकता की कमी: ग्रामीण इलाकों में अब भी लोग इन उत्पादों के महत्व से अनजान हैं.
  • महंगे उत्पाद: सभी वर्गों के लिए किफायती नहीं.

भविष्य की संभावनाए

भारत में न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग का भविष्य उज्ज्वल दिखाई दे रहा है. जीनोमिक्स और एआई आधारित स्वास्थ्य सिफारिशों से हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग सप्लीमेंट का इस्तेमाल कर रहा है. प्लांट-बेस्ड और ऑर्गेनिक उत्पादों की डिमांड अधिक है. माइक्रोबायोम रिसर्च से नए-नए प्रोडक्ट बाजार में आ रहे हैं. भारतीय कंपनियां विदेशी ब्रांड्स के साथ मिलकर बड़े स्तर पर काम कर रही हैं.

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स्वास्थ क्रांति ला रहा न्यूट्रास्यूटिकल्स उद्योग

न्यूट्रास्यूटिकल्स केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य क्रांति हैं. यह क्षेत्र न केवल आर्थिक दृष्टि से भारत और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाने की क्षमता भी रखता है. भारत के लिए यह एक अवसर है कि वह अपने आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर वैश्विक बाजार में नेतृत्व करे. बढ़ती जागरूकता, सरकारी नीतियां और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है.

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