राजस्थान में सरकारी नौकरियों में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाकर भर्ती होने वाले रैकेट का खुलासा होने के बाद राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई है. आजतक की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल डायरेक्टर नरोत्तम शर्मा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है.

कमेटी ने बुधवार से ही जांच शुरू कर दी है और रिकॉर्ड की पड़ताल के लिए सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल पहुंची. यहां ईएनटी विभाग के सहयोग से प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच की जा रही है. अब तक 100 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन्होंने मूक-बधिर या दृष्टिहीन होने के फर्ज़ी प्रमाणपत्र बनवाकर छोटी-बड़ी सरकारी नौकरियां हासिल की हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ लोग मुख्यमंत्री कार्यालय और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) जैसी अहम संस्थाओं में भी काम कर रहे हैं.

अधिकारियों ने क्या कहा

कमेटी के अध्यक्ष और स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल डायरेक्टर नरोत्तम शर्मा ने कहा, “हमने सात सदस्यीय कमेटी गठित की है और जांच शुरू हो चुकी है. यह पता लगाया जा रहा है कि ये फर्जी प्रमाणपत्र उम्मीदवारों ने खुद बनवाए या इसमें डॉक्टरों की मिलीभगत रही. दो से तीन दिन में रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी.”

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वहीं एसएमएस अस्पताल के ईएनटी हेड डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि मंत्री और विभागीय सचिव ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं. उनका कहना है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसकी तह तक जाँच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव भी दिए जाएंगे.

समाजसेवियों का आरोप

ऑल इंडिया दिव्यांग सोसाइटी के महामंत्री हेमंत भाई गोयल ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को भी इस रैकेट की जानकारी दी थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनका आरोप है कि आज भी राजस्थान में बड़ी संख्या में फर्ज़ी दिव्यांग सरकारी नौकरियों में सक्रिय हैं और असली दिव्यांगों का हक छीना जा रहा है.

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