Shani Amavasya 2025 Upay: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है. जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे शनि अमावस्या कहा जाता है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है. साथ ही, यह दिन शनि देव की कृपा प्राप्त करने और शनि दोष दूर करने का भी उत्तम अवसर है. नित्य शनि देव की उपासना से कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है और जातक को जीवन के हर कार्य में सफलता मिलती है. शनि अमावस्या के दिन यदि शनि चालीसा का पाठ किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी साबित होता है और शनि दोष कम करने में सहायक होता है.
|| श्री शनि चालिसा ||
दोहा
जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महराज.
करहुं कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज..
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चौपाई
जयती-जयती शानदेव दयाल।
करत सदा भक्तन प्रातिपला।
चार हथियार और शरीर काले विरजई।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै..
परम विशाल मनोहर भाला.
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला..
कुंडला श्रवण चामचम चमकई।
हिये माल मुक्तन मणि दमकै..
कर में गदा त्रिशूल कुठारा.
चाहे वह पल, अरिहिन संहारा।
पिंगल कृष्णा छाया नंदन।
यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन..
सूरी लो शेरनेस टेन नामा।
भानु पुत्रा पूजहिं सब कामा..
जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं.
रंकहु राउ करें क्षण माहीं..
पहाड़ आभारी होंगे।
तृणहंू को पर्वत करि डारत..
राज मिलत बन रामहि दीन्हा.
कैकइहूं की मति हरि लीन्हा..
बनहूं में मृग कपट दिखाई.
मात जानकी गई चुराई..
लषणहि शक्ति बिकल करि डारा.
मचि गयो दल में हाहाकारा..
दियो कीट करि कंचन लंका.
बजि बजरंग वीर को डंका..
नृप विक्रम पर जब पगु धारा.
चित्रा मयूर निगलि गै हारा..
हार नौलखा लाग्यो चोरी.
हाथ पैर डरवायो तोरी..
भारी दशा निकृष्ट दिखाओ.
तेलिहुं घर कोल्हू चलवायौ..
विनय राग दीपक महान किन्हो।
तब प्रसन्न प्रभु ह्नै सुख दीन्हों..
हरिशचन्द्रहुं नृप नारि बिकानी.
आपहुं भरे डोम घर पानी..
वैसे नल पर दशा सिरानी.
भूंजी मीन कूद गई पानी..
श्री शकंरहि गहो जब जाई.
पारवती को सती कराई..
तानी बिलकात हाय कारी रिसा।
नभ उड़ि गयो गौरि सुत सीसा..
पाण्डव पर ह्नै दशा तुम्हारी.
बची द्रोपदी होति उघारी..
कौरव की भी गति मति मारी.
युद्ध महाभारत करि डारी..
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला.
लेकर कूदि पर्यो पाताला..
शेष देव लखि विनती लाई.
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई..
वाहन प्रभु के सात सुजाना.
गज विशालकाय गार्डभ मृगा स्वाना।
जामबुक सिंह आदि नखा धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी..
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं.
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं..
गर्दभहानि करै बहु काजा.
सिंह सिद्धकर राज समाजा..
जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै.
मृग दे कष्ट प्राण संहारै..
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी.
चोरी आदि होय डर भारी..
तैसहिं चारि चरण यह नामा.
गोल्ड लोह चंडी अरु तम्बा।
लोह चरण पर जब प्रभु आवैं.
धन सम्पत्ति नष्ट करावैं..
समता ताम्र रजत शुभकारी.
गोल्ड सरवा सुख मंगल भरी।
जो यह शनि चरित्रा नित गावै.
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै..
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला.
करैं शत्राु के नशि बल ढीला..
जो पंडित सुयोग्य बुलवाई.
शनि ग्रह शांतिपूर्ण।
पीपल जल शनि-दिवस चढ़ावत.
दीप दान दै बहु सुख पावत..
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा.
सुमिरंत खुशी एक ही है।


