सर्गेई गोर: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालने के सात महीने बाद आखिरकार भारत के लिए अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी को चुना है. उन्होंने 38 वर्षीय सर्गेई गोर को नई दिल्ली का नया अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया है. ट्रंप का यह कदम अचानक आया, क्योंकि दो दिन पहले तक किसी को अंदाजा नहीं था कि अमेरिका इतनी जल्दी भारत में अपना शीर्ष राजनयिक भेजने जा रहा है. बाइडेन प्रशासन ने भारत में राजदूत नियुक्त करने में दो साल से भी ज्यादा का वक्त लिया था, जबकि ट्रंप ने बेहद कम समय में यह फैसला लेकर चौंका दिया है. अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों में नया पन्ना खोलने की शुरुआत कर दी है.
ट्रंप का सबसे वफादार शख्स दिल्ली में (Sergey Gor)
सर्गेई गोर सिर्फ एक राजदूत नहीं होंगे, बल्कि उन्हें दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत की जिम्मेदारी भी दी गई है. इसका मतलब है कि भारत के साथ-साथ पाकिस्तान समेत इस पूरे क्षेत्र के मामलों का वे नेतृत्व करेंगे. इस नियुक्ति से यह आशंका भी उठी है कि क्या ट्रंप भारत और पाकिस्तान को एक ही पलड़े में तौलने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप ने गोर को नियुक्त करते समय कहा कि “दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश के लिए मैंने उसी व्यक्ति को चुना है, जिस पर मैं सबसे अधिक भरोसा करता हूं.” इस बयान से साफ है कि गोर, केवल राजनयिक दूत नहीं बल्कि ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA)’ को आगे बढ़ाने का माध्यम भी होंगे.
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विवादों से घिरे रहे हैं सर्गेई गोर (Donald Trump)
गोर की छवि हमेशा से विवादों से जुड़ी रही है. दुनिया के सबसे बड़े उद्योगपति एलन मस्क ने उन्हें ‘सांप’ तक कह दिया था. मस्क ने आरोप लगाया था कि गोर की वजह से उनके एक करीबी को NASA में अहम पद नहीं मिल पाया. यही विवाद ट्रंप और मस्क के बीच टकराव का कारण भी बना. इस घटना से यह संकेत मिलता है कि गोर व्हाइट हाउस और ट्रंप के प्रशासन पर गहरी पकड़ रखते हैं. उनके प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे उन नियुक्तियों पर असर डाल सकते थे, जो सीधे अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़ी थीं.
बैन्नन ने बताया मोदी के लिए आदर्श राजदूत
ट्रंप के पूर्व सलाहकार स्टीव बैन्नन ने गोर की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होता, तो शायद इससे बेहतर राजदूत की उम्मीद नहीं करता.” बैन्नन का मानना है कि गोर की सबसे बड़ी ताकत ट्रंप से उनकी सीधी पहुंच और उस पर उनका अभूतपूर्व भरोसा है.
भारत-अमेरिका संबंधों की पृष्ठभूमि में यह बात महत्वपूर्ण है, क्योंकि ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है और कई बार उनके प्रशासन ने भारत को लेकर सख्त बयान दिए हैं. ऐसे में गोर की मौजूदगी नई दिल्ली के लिए सीधे राष्ट्रपति ट्रंप तक अपनी बात पहुंचाने का जरिया हो सकती है.
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विशेषज्ञों की नजर में गोर की अहमियत
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट माइकल कुगलमैन का मानना है कि “गोर को भारत भेजना इस बात का संकेत है कि अमेरिका दक्षिण और मध्य एशिया की रणनीति में भारत को केंद्र में रखना चाहता है.” हालांकि वे यह भी मानते हैं कि पाकिस्तान को भी समान महत्व देकर अमेरिका पुराने ढर्रे पर लौटने की कोशिश कर रहा है.
भारत के लिए अगला कदम क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि गोर की नियुक्ति भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन उनकी MAGA छवि और राजनीतिक वफादारी नई दिल्ली के लिए दबाव भी बना सकती है. गोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण होंगे, क्योंकि ट्रंप प्रशासन का पाकिस्तान-केंद्रित नजरिया भारत के लिए संवेदनशील मसला है.


