‘ईरान के गैस क्षेत्रों पर दोबारा हमला न करे इजरायल’, ट्रंप की नेतन्याहू को नसीहत, तेहरान को भी दी धमकी – Trump warned Netanyahu Israel Dont strike Iran gas fields ntc ksrj


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को खुलासा किया कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी गैस क्षेत्रों को दोबारा निशाना न बनाने की सख्त सलाह दी है. ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब इजरायल के हालिया हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल देखी गई.

ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा, “मैंने उनसे कहा कि ऐसा न करें, और वह अब ऐसा नहीं करेंगे.” यह बयान इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के एक दिन बाद आया है. इसके जवाब में ईरान ने कतर की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया, जिससे बड़े ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है. हालांकि ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दी कि यदि उसने कतर पर हमले जारी रखे, तो अमेरिका साउथ पार्स गैस फील्ड को ‘पूरी तरह उड़ा’ देगा.

हालांकि ट्रंप ने पहले सोशल मीडिया पर दावा किया था कि उन्हें इस हमले की जानकारी नहीं थी, लेकिन अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक वाशिंगटन को ऑपरेशन की जानकारी थी, भले ही उसने इसमें हिस्सा नहीं लिया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के संबंध अच्छे हैं और कई मामलों में तालमेल रहता है लेकिन अगर उन्हें कोई कदम पसंद नहीं आता तो वे उसे रोकने की कोशिश करते हैं.

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करीब तीन हफ्ते से जारी इस संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल बाजारों पर साफ दिखने लगा है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और बाजार अस्थिर बने हुए हैं. ट्रंप ने अभी तक सीधे तौर पर ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने से परहेज किया है लेकिन चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने कतर पर हमले जारी रखे तो अमेरिका साउथ पार्स गैस फील्ड को “पूरी तरह तबाह” कर सकता है. इसके जवाब में तेहरान ने कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर फिर हमला हुआ तो वह “बिना किसी रोक-टोक” के जवाब देगा.

सैन्य खर्चे का किया बचाव

ट्रंप ने इस बीच 200 अरब डॉलर के सैन्य खर्च प्रस्ताव का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह खर्च केवल ईरान संघर्ष के लिए ही नहीं, बल्कि एक अस्थिर वैश्विक स्थिति से निपटने के लिए भी जरूरी है. उनका कहना था कि “दुनिया की शीर्ष सैन्य ताकत बने रहने के लिए यह छोटी कीमत है.”

पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने भी कहा कि युद्ध के लिए अतिरिक्त फंडिंग में बदलाव संभव है और इसके लिए संसाधनों की जरूरत होती है. वहीं, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिक नहीं भेजेगा. उन्होंने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं,” हालांकि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई का अधिकार अपने पास रखने की बात भी कही.

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इसी बीच अमेरिका ने अपने अरब सहयोगियों-यूएई, कुवैत और जॉर्डन को कुल 23 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है. इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों से जुड़ा सैन्य साजो-सामान शामिल है. कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बाजारों के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है.

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