सड़क किनारे रेहड़ी पर मिलने वाली चाय का एक घूंट लेते ही सारी थकान मिट जाती है. आपने गौर किया होगा कि घर पर हम चाहे जितनी मेहनत कर लें, वो टपरी वाला सोंधापन और बैलेंस नहीं मिल पाता. कई लोग मानते हैं कि ज्यादा उबालने से चाय अच्छी बनती है, लेकिन असलियत इसके ठीक उलट है. चाय बनाने का एक खास विज्ञान है, जिसे सालों से चाय बेचने वाले ‘भैया’ बखूबी समझते हैं.

मेरे ऑफिस के सामने एक चाय वाले भैया रेहड़ी लगाते हैं. मैंने देखा कि उनके पास लोगों की लाइन लगी होती है. मैंने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया चाय में अदरक, इलायची और चाय पत्ती के साथ-साथ चीनी का रोल सबसे अहम होता है. यदि सही समय पर चीनी डालते हैं तो चाय का टेस्ट और अधिक बढ़ जाता है.

आखिर कब डालनी चाहिए चीनी?

ज्यादातर घरों में पानी उबलते ही उसमें चाय पत्ती और चीनी साथ डाल दी जाती है. रेहड़ी वाले भैया बताते हैं कि यह सबसे बड़ी गलती है. चाय में चीनी हमेशा सबसे आखिरी में डालनी चाहिए. जब चाय पूरी तरह पक जाए और उसमें दूध का रंग अच्छी तरह चढ़ जाए, तब चीनी डाली जाती है.

इसके पीछे एक गहरा लॉजिक है. चीनी को चाय पत्ती के साथ ज्यादा देर तक उबालने से उसमें एक अजीब सी कड़वाहट आ जाती है, जिससे चाय का असली फ्लेवर दब जाता है.

कड़वाहट से बचने का सही तरीका

जब आप चीनी को शुरुआत में ही डाल देते हैं, तो वह चाय पत्ती के टैनिन के साथ रिएक्ट करती है. ज्यादा देर तक आंच पर रहने के कारण चीनी जलने जैसी स्थिति में पहुँच जाती है और चाय ‘ओवर-कुक्ड’ लगने लगती है.

टपरी पर चाय पत्ती, अदरक और मसालों को पानी में खूब उबाला जाता है, फिर दूध डालकर उसे उबाला जाता है. जब चाय सर्व करने के लिए तैयार होती है, तब चीनी मिलाकर उसे बस एक हल्का उबाल दिया जाता है. इससे मिठास बरकरार रहती है और चाय कड़वी नहीं होती.

सोंधेपन के लिए अपनाएं ये टिप्स

चीनी के अलावा रेहड़ी की चाय की एक और खासियत है उसका बर्तन और आंच. लोहे या पीतल के बड़े पतीले में चाय धीरे-धीरे पकती है. अगर आप घर पर वैसा ही स्वाद चाहते हैं, तो अदरक को कूटकर पानी में तब डालें जब वो उबल रहा हो.

चाय पत्ती डालने के बाद उसे ढककर 2 मिनट पकाएं और फिर दूध डालें. अंत में चीनी डालकर गैस बंद कर दें. इस तरीके से बनी चाय आपको सीधे आपके पसंदीदा चाय वाले की याद दिला देगी.

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