‘जंग क्यों?’ अमेरिकी सीनेट में ट्रंप से सवाल… डेमोक्रेटिक नेता शूमर बोले- क्या है मकसद – us iran war senate questions trump strategy hormuz crisis oil prices impact schumer statement NTC agkp

ByCrank10

March 23, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


अमेरिका-इजरायल का ईरान से चल रहा युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश कर गया है और इस लड़ाई को लेकर ना सिर्फ दुनियाभर में बल्कि खुद अमेरिका में भी ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर अमेरिका इस जंग से हासिल क्या करना चाहता है. अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने इस युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन से तीखे सवाल पूछे और अमेरिकी अधिकारियों से कांग्रेस के सामने गवाही देने की मांग की.

एक सत्र में बोलते हुए सीनेटर चक शूमर ने कहा कि विदेश मंत्री मार्क रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सहित कैबिनेट के अन्य अधिकारियों को सीनेट के सामने पेश होकर सार्वजनिक रूप से ये गवाही देनी चाहिए कि हम इस संकट में क्यों फंसे हैं और इस अंतहीन युद्ध का क्या लक्ष्य है..साथ ही सिनेटर चक शूमर ने कहा कि कुछ रिपब्लिकन भी खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि ट्रंप प्रशासन मध्य-पूर्व में क्या हासिल करना चाहता है.

अमेरिकी जनता नहीं चाहती ईरान से युद्ध

अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में बोलते हुए चक शूमर ने ये भी कहा कि अमेरिकी जनता ईरान के साथ ऐसा युद्ध नहीं चाहती जिसका कोई अंत ही ना हो. अमेरिकी जनता नहीं चाहती की हमारे सैनिकों को बार-बार मध्य-पूर्व में तैनात किया जाए. अमेरिकी जनता इस युद्ध की कीमत तेल और राशन के बढ़े हुए दामों से भी नहीं चुकाना चाहती, इस लड़ाई का तुरंत अंत होना चाहिए.

चक शूमर का ये बयान ऐसे समय में आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान ने अगर 48 घंटे के अंदर होर्मुज़ स्ट्रेट को नहीं खोला तो उसके पावर प्लांट्स पर हमला कर पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा और इसकी शुरूआत ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से होगी, वहीं ईरान ने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर उसके ईंधन और ऊर्जा केंद्रों पर हमला होता है तो देश की सेना अमेरिका से जुड़ी एनर्जी फ़ेसिलिटीज़ को निशाना बनाएगी.

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युद्ध शुरू होने के बाद से ही करीब-करीब बंद है होर्मुज स्ट्रेट

दरअसल होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्गों में से एक है. और यहां से समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. जिसे ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से करीब-करीब बंद कर दिया है. साथ ही यहां से गुजरने वाले कई जहाजों पर हमले किए हैं. खाड़ी देशों को अरब सागर से जोड़ने वाले होर्मुज स्ट्रेट से ना केवल ईरान बल्कि कतर, इराक, कुवैत, और यूएई जैसे दूसरे खाड़ी देशों का तेल यहीं से दुनियाभर के देशों में जाता है. वहीं, होर्मुज़ स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की किल्लत देखी जा रही है.

साथ ही ईंधन की कीमतें आसमान छू रही है, हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान जैसे देशों को स्कूल-कॉलेज की छुट्टी करनी पड़ी है और सरकारी दफ्तर का 50 फीसदी काम घर से करने के लिए कह दिया गया है.

ईरान में लड़ाई को लेकर ट्रंप प्रशासन से लगातार पूछे जा रहे सवाल

28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद से ही ट्रंप प्रशासन से ये सवाल पूछा जा रहा है कि ईरान जब अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात कर ही रहा था तो उस पर हमला क्यों किया गया, वहीं, अमेरिकी मीडिया में छप रही खबरों में कहा जा रहा है कि इजरायल और सऊदी अरब के दबाव में ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर हमले का फैसला किया.

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सऊदी अरब के क्रांउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरान पर हमले के लिए राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाया. हालांकि सऊदी अरब ने न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर को सिरे से खारिज कर दिया था.

ईरान से युद्ध को लेकर चौतरफा घिरे ट्रंप

कई अमेरिकी अखबारों में दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान युद्ध में बुरी तरह से फंस गए हैं और ट्रंप को इससे निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं दिख रहा. जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंच रहा है, राष्ट्रपति ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व चीफ लियोन पैनेटा ने भी ईरान से युद्ध के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है. ब्रिटेन के अखबार गॉर्डियन को दिए एक इंटरव्यू में पैनेटा ने कहा कि  ट्रंप बहुत मुश्किल हालात में फंस गए हैं और इसके लिए वो खुद ही जिम्मेदार हैं.

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पैनेटा ने कहा कि कई सालों से अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों को इस बात की जानकारी थी कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को रोककर दुनिया भर में तेल की सप्लाई रोक सकता है. ये जाना-पहचाना खतरा था, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार ये दावा करते रहे हैं कि वो युद्ध में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और ईरान करीब-करीब तबाह हो चुका है. जबकि ट्रंप के दावे की हवा ईरान लगातार निकाल रहा है. ईरान ना सिर्फ इजरायल पर बड़े पैमाने पर बमबारी कर रहा है, बल्कि मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी लगातार निशाना बना रहा है.

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