गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और इस मौसम में बढ़ते तापमान और झुलसाती गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर (AC) मुख्य जरूरत बन गया है. ऑफिस हो या घर, अधिकतर लोग गर्मी के मौसम में अपना अधिकतर समय एसी वाले बंद कमरों में बिताने की कोशिश करते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टर्स ने बताया है कि एसी से निकलने वाली कृत्रिम ठंडी हवा हमारे श्वसन तंत्र पर सीधा हमला कर रही है. यह न सिर्फ आपकी त्वचा को रूखा बनाती है, बल्कि फेफड़ों की नमी को भी सोख लेती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
सांस की नली में सूखापन और इंफेक्शन
हैदराबाद में केयर हॉस्पिटल्स के इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट और स्लीप मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. सुधीर नादिमपल्ली के मुताबिक, ‘एसी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह कमरे की हवा से नमी को पूरी तरह खत्म कर देता है. जब हम इस सूखी हवा में सांस लेते हैं, तो हमारी नाक और गले की म्यूकस मेम्ब्रेन सूखने लगती है जो कि हमें धूल और कीटाणुओं से बचाने का काम करती है.’
‘म्यूकस के सूखने से शरीर की सेफ्टी लाइन कमजोर पड़ जाती है, जिससे सर्दी, जुकाम और गले में खराश की समस्या आम हो जाती है. लंबे समय तक ऐसी स्थिति में रहने से साइनसाइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है.’
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में रेस्पिरेटरी डिजीज और स्लीप मेडिसिन यूनिट के प्रमुख डॉ. अरुण चौधरी कोटारू का कहना है, ‘लंबे समय तक एयर कंडीशनर का इस्तेमाल शरीर की इम्यूनिटी पहली लाइन को कमजोर कर सकती है. सूखी हवा से गले में खराश हो सकती है, नाक बंद महसूस हो सकती है और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. वेंटिलेशन के बिना लगातार ठंडी हवा का संचार होने से समय के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है.’
अस्थमा के मरीजों के लिए रेड अलर्ट
अगर आप पहले से ही अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं तो एसी का ज्यादा इस्तेमाल आपके लिए खतरनाक हो सकता है. ठंडी हवा के संपर्क में आते ही सांस की नलियां सिकुड़ने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘ब्रोंकोस्पैस्म’ कहा जाता है.
अगर एसी की सर्विसिंग समय पर न की जाए तो उसके फिल्टर में जमा फफूंद और धूल के कण हवा के जरिए आपके फेफड़ों तक पहुंचते हैं जो गंभीर एलर्जी और अटैक की वजह बन सकते हैं.
थकान और सिरदर्द की बड़ी वजह
लंबे समय तक एसी में बैठने के बाद आपको भारीपन या सिरदर्द महसूस होता है. दरअसल, बंद कमरे में ताजी हवा का सर्कुलेशन नहीं होता जिससे ऑक्सीजन का लेवल हल्का कम और कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बढ़ सकता है. यही कारण है कि लोग अक्सर एसी में रहने के बावजूद थकान और सुस्ती महसूस करते हैं. यह ‘सिकल बिल्डिंग सिंड्रोम’ का एक हिस्सा है.
बचने के लिए क्या करें?
- एसी को हमेशा 24°C से 26°C के बीच ही सेट करें. बहुत कम तापमान (जैसे 16 या 18 डिग्री) शरीर के मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डालता है.
- एसी कमरे की नमी सोख लेता है इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें. हर घंटे थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें ताकि आपकी बॉडी हाइड्रेट रहे.
- दिन में कम से कम एक बार घर या ऑफिस की खिड़कियां जरूर खोलें. ताजी हवा और सूरज की रोशनी अंदर आने से बैक्टीरिया खत्म होते हैं और नमी बनी रहती है.
- एसी के फिल्टर को हर 15 दिन में साफ करें. गंदे फिल्टर से निकलने वाली धूल और फफूंद सीधे आपके फेफड़ों में जाकर इन्फेक्शन फैलाती है.
- ठंडे कमरे से निकलकर तुरंत चिलचिलाती धूप में न जाएं. बाहर जाने से 5-10 मिनट पहले एसी बंद कर दें ताकि शरीर का तापमान बाहर के वातावरण के हिसाब से ढल सके.
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