गंजेपन का होगा पक्का इलाज! वैज्ञानिकों ने लैब में उगाए असली इंसानी बाल, ऐसे काम करेगी तकनीक – hair fall treatment scientists grow human hair in lab baldness cure research tvism

ByCrank10

March 24, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


बाल झड़ने का उपचार: बाल झड़ना जहां पहले उम्र से संबंधित समस्या मानी जाती थी वहीं आज कम उम्र के लोग भी इसमें शामिल हैं. सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी गंजेपन के कारण काफी परेशान हैं. पुरुषों को जब हेयरफॉल होता है तो उसे मेंस हेयर बाल्डनेस और मेडिकल की भाषा में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया कहा जाता है. इसमें उनकी हेयर लाइन ऊंची हो जाती है, और माथे के दोनों ओर से बाल ऊपर जाने लगते हैं. इससे बचने के लिए महंगे-महंगे सीरम और तेल का इस्तेमाल करते हैं लेकिन वो भी काम नहीं आते. ऐसे लोगों को वैज्ञानिकों ने एक खुशखबरी दी है.

दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे लैब के अंदर असली इंसानी बाल उगाए जा सकेंगे. यह कोई आर्टिफिशिअल फाइबर या विग नहीं, बल्कि शरीर की कोशिकाओं से तैयार किए गए नेचुरल बाल होंगे. इस रिसर्च ने दुनिया भर के उन करोड़ों लोगों में उम्मीद जगा दी है जो गंजेपन से जूझ रहे हैं.

लैब में कैसे तैयार हुए बाल?

बायोकेमिकल एंड बायोफिजिकल रिसर्च कम्युनिकेशंस में पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, वैज्ञानिक लंबे समय से इस कोशिश में थे कि क्या इंसानी शरीर के बाहर बालों की जड़ों यानी ‘हेयर फॉलिकल्स’ को ग्रो कराया जाता सकता है. लेकिन उन्हें अब सफलता मिल गई है.

रिसर्चर्स ने स्टेम सेल्स का इस्तेमाल करके लैब की डिश (प्लेट) में बालों को उगाने में सफलता पाई है. इस प्रोसेस में खास तरह की बायो-इंजीनियरिंग का उपयोग किया गया है जिससे कोशिकाएं बिल्कुल वैसे ही काम करती हैं जैसे वे हमारे सिर की त्वचा के नीचे करती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये बाल न केवल दिखने में असली हैं बल्कि इनका स्ट्रक्चर भी पूरी तरह प्राकृतिक बालों जैसा ही है इसलिए ये बाल बिल्कुल हमारे असली बाल जैसे हैं.

हेयर ट्रांसप्लांट से कैसे अलग है यह तकनीक?

अभी जिन लोगों को गंजेपन की शिकायत होती है वे लोग हेयर ट्रांसप्लांट कराते हैं लेकिन इसकी एक लिमिट है क्योंकि हेयर ट्रांसप्लांट में आपके सिर के पिछले हिस्से से बाल निकालकर खाली जगह पर लगाए जाते हैं. यानी अगर आपके पास पर्याप्त डोनर हेयर नहीं है तो ट्रांसप्लांट संभव नहीं होता.

लेकिन इस नई तकनीक आने के बाद हेयर डोनर की जरूरत खत्म हो सकती है क्योंकि लैब में कितने भी बाल उगाए जा सकेंगे जिन्हें बाद में मरीज के सिर पर प्लांट किया जा सकेगा. यह उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जिनके सिर पर बाल नहीं हैं.

क्या यह आम लोगों के लिए उपलब्ध है?

यह रिसर्च काफी अच्छी है लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि अभी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने में थोड़ा समय लग सकता है. फिलहाल यह प्रयोग लैब लेवल पर पूरी तरह सफल रहा है. अब इसके ह्यूमन ट्रायल यानी इंसानों पर परीक्षण की तैयारी की जा रही है.

सेफ्टी स्टेंडर्ड और सक्सेस रेट को जांचने के बाद ही इसे क्लिनिक तक लाया जा सकेगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में यह तकनीक हेयर लॉस ट्रीटमेंट को पूरी तरह बदल देगी और गंजापन पुराना हो जाएगा क्योंकि नए समय में इस ट्रीटमेंट से सबके सिर पर बाल होंगे.

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