E30 पेट्रोल समाचार: दुनिया में तनाव बढ़ रहा है. तेल महंगा हो रहा है. और भारत अपनी जेब और जरूरत, दोनों को बचाने का रास्ता खोज रहा है. ऐसे में एथेनॉल एक बार फिर चर्चा में है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखी है. मांग सीधी है. पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाई जाए, और ऐसे वाहनों पर फोकस किया जाए जो फ्लेक्स फ्यूल पर बेस्ड हों. यानी मामला सिर्फ फ्यूल का नहीं, देश की एनर्जी सिक्योरिटी का है.
दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व के तनाव के बीच भारत अब अपने फ्यूल ऑप्शन को बेहतर करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. बीते कल यानी 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए अपने संबोधन में भी भारत के दशकों पहले की गई तैयारियों के फायदे को गिनाया था. पीएम मोदी ने कहा कि, “भारत ने बीते 11 सालों में अपनी एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन किया है. पहले क्रूड ऑयल, एलपीजी, एनएनजी ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था. वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट करता है.”
वहीं एथेनॉल को लेकर उन्होंने कहा कि, “संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी बहुत काम आ रही है. पिछले 10-11 साल में एथेनॉल के उत्पादन और उसके ब्लेंडिंग पर बहुत बढ़िया काम हुआ है. एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक एथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है.”
इसी कड़ी में ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने सरकार को पत्र लिखकर एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने की मांग की है. AIDA का कहना है कि यह कदम न केवल पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी को भी मजबूत बनाएगा.
E20 के बाद अब E30 की तैयारी
AIDA ने अपने पत्र में कहा कि, भारत ने तय समय से पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का टार्गेट पूरा कर लिया है, जो सरकार और इंडस्ट्री के साझा प्रयासों के बदौलत संभव हो पाया है. अब संस्था चाहती है कि इस लेवल को बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाए. उनका मानना है कि ऐसा करने से कच्चे तेल के आयात में बड़ी कमी आएगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा खर्च भी घटेगा और अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी.
संस्था ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देश पर पड़ सकता है. क्योकि हमारे यहां ऑयल इंपोर्ट पर निर्भरता ज्यादा है. ऐसे हालात में एथेनॉल जैसे घरेलू और बेहतर फ्यूल ऑप्शन पर फोकस करना जरूरी है. एथेनॉल देश की इकोनॉमी के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा.
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन
AIDA ने सरकार से अपील की है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया जाए. ये वाहन अलग-अलग लेवल के एथेनॉल ब्लेंडिंग, यहां तक कि 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकते हैं. ब्राजील जैसे देशों में यह तकनीक पहले से सफल है और वहां बड़े पैमाने पर ऐसे वाहन प्रयोग में लाए जा रहे हैं. भारत में भी इस तकनीक को अपनाने से एथेनॉल की मांग लगातार बनी रहेगी और किसानों को गन्ना जैसी फसलों का बेहतर दाम मिलेगा.
AIDA ने सुझाव दिया है कि एथेनॉल का उपयोग सिर्फ वाहनों तक सीमित न रखा जाए. घरेलू और कमर्शियल किचन में भी एथेनॉल बेस्ड बर्नर और कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा देने की बात कही गई है. इसका इस्तेमाल खासकर ग्रामीण और नॉन-मेट्रो सिटी में आसानी से किया जा सकता है, जहां आज भी लकड़ी या ट्रेडिशनल कुकिंग मैथड का इस्तेमाल होता है.
डीजल में भी एथेनॉल
एसोसिएशन ने डीजल में एथेनॉल मिलाने की बात कही है. अगर यह तकनीक सफल होती है, तो इससे डीजल की लागत कम हो सकती है और एथेनॉल के उपयोग का दायरा और भी बढेगा. हालांकि, इसको लेकर सरकार पहले की तैयारी कर चुकी है. पिछले साल अगस्त में पुणे में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, “एथेनॉल हमारे लिए एक शुरुआत है, ये कोई अंत नहीं है. ऑटोमोटिव रिसर्च ऑफ इंडिया (ARAI) ने एथेनॉल के बाद आइसोब्यूटेनॉल पर काम करना शुरू कर दिया है. और अभी वो डीजल में 10% आइसोब्यूटेनॉल डालकर प्रयोग कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100% आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया है.”
AIDA ने सरकार से मुलाकात कर एक विस्तृत रोडमैप पेश करने की इच्छा जताई है. इस रोडमैप में यह बताया जाएगा कि कैसे एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाकर भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर सकता है, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ सकता है. कुल मिलाकर, एथेनॉल अब सिर्फ एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है.
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