‘सब छिपकर तमाशा देखते रहे… वो गोली चलाता रहा. अगर थोड़ी हिम्मत और होती तो शायद सूर्या भैया आज जिंदा होते…’ यह शब्द हैं उस चश्मदीद छात्रा शिवानी सिंह के, जो वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में हुए सनसनीखेज हत्याकांड के वक्त महज कुछ कदम की दूरी पर खड़ी थी. वायरल वीडियो में दिख रही छात्रा अब सामने आई है और उसने उस दिन के हर पल को बयान किया है.

वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में क्लास रूम के बाहर दिनदहाड़े हुई छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही है. इस हत्याकांड के सामने आने के बाद से लगातार नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं, लेकिन इस बार जो कहानी सामने आई है, वह सीधे उस जगह से है जहां सब कुछ हुआ.

सब कुछ सेकंडों में खत्म हो गया

शिवांगी बताती है कि उस दिन सब कुछ सामान्य था. वह रोज की तरह कॉलेज पहुंची, बैग लाइब्रेरी में रखा और अपनी दोस्त को क्लास में छोड़ने जा रही थी. सीढ़ियों के पास छात्रों की भीड़ थी और उन्हीं के बीच सूर्य प्रताप भी खड़े थे. मैंने जैसे ही एक कदम आगे बढ़ाया, अचानक गोली चलने की आवाज आई. पहले तो समझ ही नहीं आया, लेकिन जब सूर्या भैया को गिरते देखा तो सब कुछ साफ हो गया.  उसके मुताबिक, हमले की रफ्तार इतनी तेज थी कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला.

गन लेकर कॉलेज में कैसे पहुंचा ?

घटना के बाद शिवांगी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आरोपी कॉलेज परिसर में हथियार लेकर पहुंचा कैसे. वह कहती है, अगर गेट पर चेकिंग होती, अगर थोड़ी सख्ती होती, तो शायद यह सब नहीं होता. उसके मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था की कमी इस घटना की एक बड़ी वजह हो सकती है.

बचाने की कोशिश, लेकिन लौट आया हमलावर

वीडियो में खड़े रहने को लेकर उठ रहे सवालों पर शिवांगी साफ कहती है कि वह तमाशा नहीं देख रही थी, बल्कि सूर्या को बचाने की कोशिश कर रही थी. वह कहती है कि पहली गोली के बाद वह भाग गया था. हमें लगा अब मौका है, हम बचा लेंगे… लेकिन वह फिर लौट आया, शिवानी के अनुसार, आरोपी ने वापस आकर दूसरी बार गोली चलाई, जिससे हालात और बिगड़ गए. वह जोड़ती है कि अगर हमें पता होता कि वह वापस आएगा, तो हम उसे तुरंत वहां से हटा देते.

थोड़ी और हिम्मत होती…

शिवांगी बार-बार इसी बात पर लौटती है कि अगर थोड़ी और हिम्मत होती, अगर कुछ और लोग साथ आ जाते, तो शायद नतीजा अलग होता. वह कहती है कि हमने कोशिश की थी, लेकिन सब कुछ इतना अचानक हुआ कि समझ नहीं आया क्या करें. अगर मेरे साथ दो-चार लोग और होते, तो शायद हम उसे बचा लेते.  घटना के बाद घर पहुंचने पर परिवार ने भी उसे सवालों के घेरे में रखा. घर वालों ने कहा कि वहां जाना ही नहीं चाहिए था, और अगर गई थी तो बचाने की कोशिश करनी चाहिए थी.  शिवांगी मानती है कि यह बात उसे भी अंदर से कचोटती है. कई बार लगता है कि काश थोड़ा और साहस दिखाया होता.

हम डरने वालों में नहीं हैं

डर के सवाल पर उसका जवाब साफ है कि हमारी परवरिश ऐसी नहीं है कि हम डरकर भाग जाएं. वह बताती है कि उस दिन भी वह डरी नहीं थी, बल्कि आखिरी तक वहीं खड़ी रही और मदद करने की कोशिश करती रही. उसके मुताबिक, सिर्फ एक सर थे जो आगे आए. बाकी लोग दूर खड़े रहे या छिप गए. वह यह भी बताती है कि हमलावर ने धमकी दी थी कि जो भी आगे आएगा, उसे भी गोली मार दी जाएगी. इस वजह से कोई सामने नहीं आया. शिवानी का आरोप है कि प्रिंसिपल ने तो घायल सूर्या भैया को अस्पताल ले जाने के लिए अपनी गाड़ी देने से भी मना कर दिया था.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *