Bihar Board 12th Result 2026: क्या है वो ‘ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी’? रिजल्ट में बिहार बोर्ड ने किया जिसका इस्तेमाल, CBSE भी करती है यूज – what is blockchain technology used in bihar Board results know details ngix


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने 2026 के इंटरमीडिएट नतीजों के साथ न केवल देश में सबसे पहले रिजल्ट देने का रिकॉर्ड बनाया है बल्कि शिक्षा जगत में एक ‘डिजिटल क्रांति’ की शुरुआत भी कर दी है. इस साल बिहार बोर्ड देश का पहला ऐसा शिक्षा बोर्ड बन गया है जिसने अपनी परीक्षा प्रणाली में ‘ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी’ (Blockchain Technology) का इस्तेमाल किया है.

लेकिन आखिर यह तकनीक है क्या और इससे छात्रों को क्या फायदा होगा? आइए समझते हैं आसान भाषा में.

क्या है ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी?

आसान शब्दों में कहें तो ब्लॉकचेन एक डिजिटल लेजर (Digital Ledger) या बहीखाता है. इसमें डेटा को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में सुरक्षित रखा जाता है, जो एक-दूसरे से एक चेन की तरह जुड़े होते हैं. इस चेन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार इसमें डेटा (जैसे आपकी मार्कशीट)दर्ज हो गया, तो उसे न तो बदला जा सकता है और न ही डिलीट किया जा सकता है.

बिहार बोर्ड को इससे क्या फायदा हुआ?

बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस तकनीक के आने से तीन बड़े बदलाव हुए हैं:

फर्जीवाड़ा खत्म (Tamper-Proof): अब कोई भी जालसाज फोटोशॉप या किसी अन्य सॉफ्टवेयर के जरिए बिहार बोर्ड की फर्जी मार्कशीट तैयार नहीं कर पाएगा.अगर कोई मार्कशीट से छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा, तो ब्लॉकचेन का डिजिटल सिग्नेचर उसे तुरंत पकड़ लेगा.

वेरिफिकेशन हुआ आसान: पहले नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए मार्कशीट वेरिफिकेशन में महीनों लग जाते थे.अब ब्लॉकचेन के जरिए कंपनियां या यूनिवर्सिटीज महज कुछ सेकंड में क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके मार्कशीट की असलियत जान सकेंगी.

डेटा की सुरक्षा: ब्लॉकचेन विकेंद्रीकृत (Decentralized) होता है, यानी इसका डेटा किसी एक सर्वर पर नहीं बल्कि कई नोड्स पर होता हैं. इससे सर्वर हैक होने या डेटा चोरी होने का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाता है.

25 दिन में रिजल्ट के पीछे का ‘सॉफ्टवेयर’

सिर्फ ब्लॉकचेन ही नहीं बोर्ड ने इस साल खुद का विकसित किया हुआ इन-हाउस सॉफ्टवेयर भी इस्तेमाल किया है. इस सॉफ्टवेयर ने कॉपियों की स्कैनिंग से लेकर अंकों की फीडिंग तक की प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बना दिया. यही कारण है कि आदित्य प्रकाश (Science),साक्षी कुमारी (Arts) और अदिति कुमारी (Commerce) जैसे टॉपर्स का वेरिफिकेशन और रिजल्ट प्रकाशन रिकॉर्ड 25 दिनों में संभव हो पाया.

छात्रों के लिए क्या बदला?

अब छात्रों को अपनी ओरिजिनल मार्कशीट के लिए लंबा समय तक इंतजार नहीं करना होगा. उनकी डिजिटल मार्कशीट ब्लॉकचेन पर सुरक्षित है, जिसे वे डिजिलॉकर (DigiLocker) के माध्यम से कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं. यह मार्कशीट पूरी तरह लीगल और सिक्योर है.

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छेड़छाड़ रोधी रिकॉर्ड
परिणाम प्रमाणीकरण



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