Durga Ashtami 2026: अष्टमी पर घर की इस दिशा में करें कन्या पूजन, वास्तु एक्सपर्ट ने बताए फायदे – Durga Ashtami 2026 kanya pujan best area or direction Chaitra Navratri vastu tips tvisu


दुर्गा अष्टमी 2026: 26 नवंबर को चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि है. इस दिन कन्या पूजन का विधान बताया गया है. दुर्गा अष्टमी पर छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. कन्या पूजन किस स्थान या दिशा पर करें, इसका ख्याल रखना भी जरूरी होती है. मां दुर्गा और कन्या पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशा के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी ही नहीं होती है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

वास्तु के अनुसार, सभी देवी-देवताओं के लिए उनकी ऊर्जा और तत्व के अनुसार अलग-अलग स्थान निश्चित हैं. मां दुर्गा को अग्नि तत्व से जोड़ा गया है. इसलिए अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन के लिए घर का अग्नि कोण सबसे उत्तम होता है. यह आपके घर की साउथ-ईस्ट, साउथ-साउथ-ईस्ट और साउथ दिशा है. सामान्यतः घरों में मंदिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित होता है.

यदि आप अपने मंदिर में ही अष्टमी-नवमी का पूजन करना चाहते हैं तो ईशान कोण में स्थापित मंदिर भी कर सकते हैं. किसी भी ईश्वर की पूजा के लिए यह स्थान भी श्रेष्ठ है. लेकिन तत्वों के आधार पर देखें तो मां भगवती की पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान अग्नि कोण ही होता है.

दुर्गा पूजन के लिए क्यों श्रेष्ठ है अग्नि कोण?
मां दुर्गा को राक्षसों के विनाश और भक्तों के संरक्षण से जोड़ा जाता है. इसलिए इनके लिए अग्नि कोण सर्वश्रेष्ठ है, जो साहस और ऊर्जा को प्रदर्शित करता है. एक मुख्य वजह यह भी है कि मां भगवती के पूजन में अधिकतर लाल रंग की सामग्री का प्रयोग होता है. जैसे माता की चौकी पर लाल कपड़ा. मां की पोशाक का रंग भी लाल होता है. कन्या पूजन में कन्याओं को भी लाल चुनरी ओढ़ाई जाती है.

ईशान कोण जल तत्व का स्थान है. वहां इस तरह की सामग्री की उपस्थिति का अर्थ है कि जल में अग्नि का आना है. जो दोनों तत्वों के लिए सही नहीं है. लेकिन अग्नि कोण में लाल रंग का उपयोग करना फलदायी है. इसलिए यदि आप ईशान कोण में मां दुर्गा का पूजन करना चाहते हैं तो वहां लाल रंग का उपयोग कम से कम करें.

किस दिशा में न करें कन्या पूजन
वास्तु के अनुसार, दक्षिण से पश्चिम दिशा तक न तो किसी देवता का स्थान होना चाहिए. और न ही यहां मंदिर की स्थापना करनी चाहिए. यह पितरों का स्थान है. इस दिशा में कन्या पूजन करने से जिस मनोकामना के साथ आप मां भगवती की आराधना करते हैं, उसके फलीभूत होने की संभावना नहीं रहती है.

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