भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान उस समय कड़ी नाराजगी जताई, जब एक याचिकाकर्ता के पिता की ओर से उनके भाई को फोन कर अदालत के आदेश पर आपत्ति जताने की बात सामने आई. यह मामला निखिल कुमार पुनिया से जुड़ा है, जो हरियाणा के जाट पुनिया समुदाय में पैदा हुए थे. उन्होंने उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में बौद्ध धर्म अपनाने के बाद अल्पसंख्यक आरक्षण की मांग की थी.

28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को ‘एक नए तरह का धोखा’ बताते हुए, याचिकाकर्ता के अल्पसंख्यक प्रमाण पत्रों की जांच का निर्देश दिया था. बुधवार को CJI इस ‘चौंकाने वाली’ घटना का जिक्र करते हुए बेहद नाराज हो गए और कहा, ‘ऐसा करने की हिम्मत किसी में नहीं होती. और आपको लगता है कि मैं इस वजह से केस किसी और को सौंप दूंगा? मैं पिछले 23 सालों से ऐसे लोगों से निपटता आ रहा हूं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अब आप हमें बताइए कि हम आपके मुवक्किल के पिता के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​की कार्रवाई क्यों न शुरू करें? उन्होंने (पिता ने) जो किया है, क्या मैं उसे खुली अदालत में बताऊं?’

‘उन्होंने मेरे भाई को फोन किया और पूछा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने यह आदेश कैसे पारित कर दिया. क्या वह मुझे हुक्म देंगे?’

क्या बोले CJI सूर्यकांत?
इस रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए CJI ने वकील से कहा, ‘आप इसकी (इस रवैये की) पुष्टि करें. एक वकील के तौर पर, आपको सबसे पहले इस केस से पीछे हटने पर विचार करना चाहिए. यह सरासर गलत है. भले ही वह भारत से बाहर हों, मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है.’ इस पर वकील ने माफी मांगी. उन्होंने कहा, ‘मुझे बहुत अफसोस है, सर, लेकिन मुझे इस सब के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.’

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते तक के लिए टाल दी. अदालत ने पाया कि हरियाणा सरकार ने अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के दिशानिर्देशों के संबंध में कोई अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) दाखिल नहीं की थी. इन दिशानिर्देशों में यह भी शामिल है कि क्या सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार बौद्ध धर्म अपनाने का दावा करके अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं.

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