मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका जंग के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने वॉशिंगटन की युद्ध रणनीति पर तंज कसा है. उन्होंने अमेरिका और इजरायल की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही जंग के मकसद अब स्पष्ट नहीं रह गए हैं और समय के साथ बदलते नजर आ रहे हैं.

ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कटाक्ष करते हुए लिखा, ‘ऐसा लगता है कि अब युद्ध का मकसद बदलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना रह गया है, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह रास्ता पूरी तरह खुला हुआ था.’

दरअसल, ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ही तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार प्रभावित हुआ है. आसिफ का इशारा इस ओर था कि अमेरिका ने खुद ही संकट पैदा किया और अब उसे सुलझाने को ही अपनी जीत बताने की कोशिश कर रहा है.

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है, और इसके द्वारा प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचता है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे न केवल मिडिल ईस्ट की राजनीति में, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाती है.

होर्मुज जलडमरूमध्य की लंबाई लगभग 39 किलोमीटर और चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर मात्र 33 किलोमीटर है. इसके उत्तर में ईरान स्थित है, जबकि दक्षिण में ओमान का समुद्री इलाका फैला हुआ है. यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है.

पाकिस्तान ने शांति वार्ता की पेशकश की

बता दें कि ईरान-अमेरिका और इजरायल का युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंचने के साथ ही पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकश की है. पाकिस्तान इस युद्ध में खुद को एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट करके इसके संकेत दिए हैं. उन्होंने लिखा, ‘पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत करता है और उन्हें पूर्ण समर्थन देता है.’

हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ सीधे बातचीत नहीं करेगा. ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान बातचीत नहीं माना जा सकता और फिलहाल औपचारिक वार्ता का कोई इरादा नहीं है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *