अमेरिका के युद्ध विशेषज्ञ और भू-राजनीतिक सलाहकार कर्नल (सेवानिवृत्त) डगलस मैकग्रेगर ने कहा है कि अगर भारत मध्यस्थता के लिए कदम बढ़ाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुन सकते हैं. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी दोनों पक्षों की जटिल मांगों को सरल कर सकते हैं और वास्तविकता पर आधारित युद्धविराम की रूपरेखा तय कर सकते हैं.

मैकग्रेगर ने एक पोडकास्ट में कहा कि मौजूदा समय में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध से निपटने के लिए किसी भरोसेमंद मध्यस्थ की तलाश उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि युद्ध को खत्म करना. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सवाल सिर्फ प्रभाव का नहीं, बल्कि भरोसे का है कि कौन विभाजित गुटों में विश्वास अर्जित कर सकता है.

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य शक्ति, साथ ही वैश्विक स्तर पर जिस भरोसे के साथ भारत देखा जाता है, उसे इस मामले में विशेष और अनूठा स्थान देता है. मैकग्रेगर ने कहा कि पीएम मोदी रूस, ईरान, इजरायल और अमेरिका जैसी प्रमुख ताकतों के बीच विश्वास का पुल बनने की क्षमता रखते हैं. उन्होंने जोड़ा कि भारत की यह स्थिति इसे विरोधी पक्षों के बीच संवाद का माध्यम बनने में सक्षम बनाती है.

भारत की वैश्विक ताकत और भरोसा बनाए अवसर

साथ ही उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी जटिल मांगों को सरल कर युद्धविराम की वास्तविक रूपरेखा तय करने में मदद कर सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें ऐसे समाधान खोजने होंगे जो दो-तीन बिंदुओं पर आगे की बातचीत का आधार बन सकें और अस्थायी युद्धविराम सुनिश्चित कर सकें. मैकग्रेगर ने सुझाव दिया कि पीएम मोदी ट्रंप से संपर्क करें और कहें कि भारत इस प्रक्रिया में अधिक सहयोग कर सकता है.

वहीं, पाकिस्तान को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक तटस्थ मध्यस्थ नहीं हो सकता. मैकग्रेगर ने कहा कि पाकिस्तान का हस्तक्षेप वैसा ही है जैसे कोई जलती इमारत में खड़ा व्यक्ति आपको इमारत का एक कमरा ऑफर कर दे. उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियों और आंतरिक चुनौतियों को इसका मुख्य कारण बताया और कहा कि इजरायल इसे समस्या का हिस्सा ही मानेगा.

उन्होंने पाकिस्तान की तरफ से आए बयान को भी आलोचना का कारण बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कहा है कि अगर इजरायल परमाणु हथियार का प्रयोग करे तो वह इसके जवाब में इजरायल पर हमला करेगा. ऐसे में पाकिस्तान के पास किसी भी समझौते को मध्यस्थता करने की विश्वसनीयता नहीं है.

पाकिस्तान संघर्ष समाधान में असहायक

मैकग्रेगर ने चेताया कि यह संघर्ष केवल तत्कालीन संकट नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव का हिस्सा है, जिसके दीर्घकालिक आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव होंगे. उन्होंने कहा कि युद्ध सिर्फ अल्पकालीन संकट नहीं है, बल्कि लंबे समय तक चलेगा और इसकी जटिलताएं कई देशों की नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं.

विशेष रूप से उन्होंने भारत को एक सक्षम मध्यस्थ के रूप में देखा. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को ट्रंप के साथ बातचीत के माध्यम से दोनों पक्षों को शांत करने का मौका है. भारत की वैश्विक छवि और भरोसेमंद भूमिका इसे इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बनाती है. मैकग्रेगर ने कहा कि भारत के पास रूस और ईरान के साथ सहजता है और इजरायल भी भारत से संवाद में सहज महसूस करता है. साथ ही अमेरिका भी भारत की भूमिका को स्वीकार करता है. यह वैश्विक विश्वास और संतुलन भारत को एक अनूठा अवसर प्रदान करता है.

उन्होंने कहा कि भारत के मध्यस्थता प्रयास से संघर्ष में कमी और वास्तविक युद्धविराम स्थापित हो सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि दो-तीन महत्वपूर्ण बिंदु तय कर आगे की बातचीत का आधार बनाया जा सकता है, जिससे अस्थायी युद्धविराम भी संभव है.

वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन पर दीर्घकालिक प्रभाव

पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने चेतावनी दी कि यह देश संघर्ष समाधान में कोई भूमिका नहीं निभा सकता. पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता इसे तटस्थ मध्यस्थ बनने से रोकती है. साथ ही उनके बयान और कूटनीतिक रवैये के कारण यह इजरायल के दृष्टिकोण में समस्या का हिस्सा ही माना जाएगा. मैकग्रेगर ने अंत में कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन और युद्ध के परिणामों को देखते हुए भारत की भूमिका निर्णायक हो सकती है. पीएम मोदी के पहल करने से न केवल युद्धविराम संभव है, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की दिशा भी मिल सकती है.

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पीएम मोदी मध्यस्थ



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