नेपाल में आज नए प्रधानमंत्री के तौर पर बालेन्द्र शाह शपथ लेने जा रहे हैं. उनका ये शपथग्रहण समारोह खास होने वाला है. शपथग्रहण का शुभ मुहूर्त आज शुक्रवार को चैत्र नवरात्र के श्रीरामनवमी की तिथि पर हो रहा है.यह वही समय है जब अयोध्या में राम मंदिर में रामनवमी के अवसर पर विशेष पूजा हो रही है.

यह शपथग्रहण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया न होकर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा विशेष आयोजन भी है. शपथग्रहण समारोह के दौरान 108 हिन्दू बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन किया जाएगा, जिसे शुभ और मंगलकारी माना जाता है. इसके साथ ही 107 बौद्ध लामा गुरु भी मंगल पाठ करेंगे, जिससे बौद्ध परंपरा के अनुसार शांति और समृद्धि की कामना की जाएगी. इसके अलावा, 7 ब्राह्मण शंखनाद भी करेंगे.

क्या है स्वस्ति वाचन?

स्वस्तिवाचन , ऋग्वेद का एक प्रभावशाली मंत्र है. यह मंत्र, पूजा-पाठ की शुरुआत में समृद्धि और कल्याण की कामना के लिए गाये जाते हैं. स्वस्ति वाचन का मतलब है, ‘कल्याण हो’. स्वस्ति शब्द, संस्कृत के दो शब्दों ‘सु’ और ‘अस्ति’ से मिलकर बना है. यह मंगल पाठ, सभी देवी-देवताओं को जागृत करता है. शास्त्रों के अनुसार, अगर आप दिन में एक बार भी स्वस्ति वाचन सुनते हैं, तो इससे मन और स्वास्थ्य में सुधार होता है. सनातन प्राचीन परंपरा है कि कोई भी काम शुरू करने से पहले मंगल की कामना की जाती है.

वृद्ध-श्रवण इंद्र धन्य हो, और विश्व-वेद पूषा धन्य हो।
तार्क्ष्य, अरिष्टनेमि और बृहस्पति हम सबको शुभता प्रदान करें।

आइए हम अपने कानों से देवताओं का सौभाग्य सुनें और अपनी आँखों से बलिदानियों का शुभ समाचार देखें।
हम अपने स्थिर अंगों और शरीरों से संतुष्ट हैं, और हम देवताओं के कल्याण के लिए शांति से विश्राम करते हैं।

ॐ स्वर्ग पर शांति हो, अंतरिक्ष पर शांति हो, पृथ्वी पर शांति हो, जल पर शांति हो, जड़ी-बूटियों पर शांति हो।
पौधों पर शांति हो, विश्व पर शांति हो, देवताओं पर शांति हो, ब्राह्मण पर शांति हो, सब पर शांति हो, आप पर शांति हो,
वही मेरी शांति है. ॐ शांति, शांति, शांति.

भारत की यह प्राचीन परंपरा रही है कि जब कभी भी हम कोई कार्य प्रारम्भ करते है, तो उस समय मंगल की कामना करते हैं.

अ नो भद्रः क्रतवो यन्तु विश्वतो अदबधासो अपरित्सा उद्भिदः।
जब हम बूढ़े और जवान होते हैं तो देवता स्वर्ग में हमारी रक्षा करते हैं

अर्थ – हमारे पास चारों ओर से ऐंसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों. प्रगति को न रोकने वाले और सदैव रक्षा में तत्पर देवता प्रतिदिन हमारी वृद्धि के लिए तत्पर रहें.

ऋग्वेद प्रथम मंडल का यह 89वां सूक्त शुक्ल यजुर्वेद वाजसनेयी-संहिता (25/14-23), कण्व संहिता, मैत्रेय संहिता और ब्राह्मण और आरण्यक ग्रंथों में समान पाया जाता है। इस सूक्त में 10 ऋचाएं हैं, इस सूक्त के द्रष्टा गौतम ऋषि हैं तथा देवता विश्वेदेव हैं।

इस तरह पूरा शपथग्रहण समारोह सनातन धर्म की ध्वनि से गुंजायमान होगा. इस तरह यह आयोजन नेपाल की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाएगा, जहां विभिन्न परंपराओं को एक साथ सम्मान दिया जाता है. कुल मिलाकर, बालेन्द्र शाह का शपथग्रहण समारोह धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक प्रतीकों और राष्ट्रीय महत्व के एक भव्य आयोजन के रूप में आयोजित होने जा रहा है, जो देश में नई सरकार के गठन के साथ नई उम्मीदों और ऊर्जा का संदेश भी देगा.

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