उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण ने गुरुवार शाम कन्नौज के रोमा स्मारक पर आयोजित संस्कृति विभाग के कार्यक्रम में जिला प्रशासन द्वारा किए गए ‘अनादर’ पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. मंत्री असीम अरुण निर्धारित समय शाम 5:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए थे, लेकिन मुख्य आयोजक एसडीएम वैशाली उनके 15 मिनट बाद पहुंचीं.

इसके बाद डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के आने के इंतजार में करीब 45 मिनट तक कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया. मंच से बार-बार होती घोषणाओं और अधिकारियों की देरी से क्षुब्ध होकर मंत्री अपनी टीम के साथ वहां से चले गए. इस घटना के बाद मंत्री ने डीएम को शिकायती पत्र लिखकर इसे अनुशासनहीनता करार दिया, वहीं नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर प्रदर्शन कर अधिकारियों को तत्काल हटाने की मांग की.

मंत्री का डीएम को कड़ा पत्र

मंत्री असीम अरुण ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से अपना खेद प्रकट किया है. उन्होंने लिखा कि एक अनुशासित नागरिक होने के नाते वह समय पर पहुंचे, लेकिन वहां का अनुभव शिष्टाचार के विपरीत रहा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से प्रेरणा लेनी चाहिए जो समय की पाबंदी के लिए जाने जाते हैं. मंत्री ने हिदायत दी कि भविष्य में टीम द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में समय की गरिमा बनी रहे क्योंकि वह स्वयं भी समयबद्धता का पालन करते हैं.

सड़कों पर फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा

मंत्री के साथ हुए इस व्यवहार से कन्नौज के भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए. जिला अध्यक्ष वीर सिंह भदोरिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपनी ही सरकार में कैबिनेट स्तर के मंत्री का इस तरह इंतजार कराना और उनका अपमान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि लापरवाह डीएम और एसडीएम को तत्काल प्रभाव से जिले से हटाया जाए. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं को समझाने खुद मंत्री असीम अरुण को भी पहुंचना पड़ा.

प्रशासनिक चूक या प्रोटोकॉल का उल्लंघन?

संस्कृति विभाग के इस कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था ने जिले के प्रशासनिक तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां मंत्री ने इसे अनुशासनहीनता बताया है, वहीं कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से जिले में तनावपूर्ण माहौल है. मंत्री ने साफ कर दिया है कि एक लोक सेवक के रूप में समय की बर्बादी और असहज स्थिति स्वीकार्य नहीं है. अब देखना यह है कि मंत्री की इस सीधी नाराजगी के बाद शासन स्तर पर कन्नौज के इन आला अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है.

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