मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए साफ कहा है कि ईरान किसी भी कीमत पर झुकेगा नहीं और यह जंग ‘जीत के बिना खत्म नहीं होगी.’ उन्होंने आत्मसमर्पण की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया. एक महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष के बीच कालिबाफ ने दावा किया कि ईरान और उसके सहयोगियों ने अमेरिका और उसके साझेदारों को ‘भारी नुकसान’ पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि लेबनान, इराक और यमन में मौजूद प्रतिरोधी ताकतें लगातार मजबूत हो रही हैं.

मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने अमेरिका पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि एक तरफ वॉशिंगटन सार्वजनिक तौर पर बातचीत की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे सैन्य हमलों की तैयारी भी जारी है. उन्होंने कहा, ‘दुश्मन बातचीत की बात करता है, लेकिन हमले की योजना बनाता है,’ और लोगों को ऐसे बयानों से भ्रमित न होने की चेतावनी दी.

सेना भेजने की तैयारी कर रहा अमेरिका!
इस बीच पेंटागन की ओर से ईरान में संभावित जमीनी अभियान की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. खबरों के मुताबिक, हजारों अमेरिकी सैनिक और मरीन पहले से ही मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. अमेरिका सीमित लेकिन प्रभावी हमलों की योजना बना रहा है, जिसमें मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस और तटीय ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है.

हालांकि अमेरिकी अधिकारी इसे पूर्ण युद्ध नहीं बता रहे, लेकिन योजनाओं में तेज और छोटे ऑपरेशन शामिल हैं, जो कुछ हफ्तों तक चल सकते हैं. इसके अलावा ‘आखिरी बड़ा वार’ जैसे विकल्पों पर भी विचार हो रहा है. इसमें ईरान के अहम तेल केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा या नाकाबंदी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास रणनीतिक ठिकानों पर हमला और परमाणु ठिकानों से जुड़ी सीमित जमीनी कार्रवाई शामिल हो सकती है.

ईरान ने दी अमेरिका को चेतावनी
कालिबफ ने संकेत दिया कि ईरान ऐसी किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि दुश्मन के लिए ईरान में घुसना आसान नहीं होगा और मिसाइल हमले जारी रहेंगे. साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान के दुश्मनों में ‘डर और घबराहट’ देखी जा रही है. उन्होंने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका ईरान को झुकाने की कोशिश करेगा तो उसे नाकामी ही मिलेगी. उन्होंने कहा, ‘जब तक वे ईरान के आत्मसमर्पण की बात करेंगे, जवाब साफ है, हम अपमान स्वीकार नहीं करेंगे.’

‘हमले का जवाब दिया जाएगा’
मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने इस संघर्ष को वैश्विक टकराव का हिस्सा बताते हुए कहा कि ईरान पूरी ताकत से सैन्य और जन समर्थन के साथ आगे बढ़ेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी हमले का जवाब ऐसा दिया जाएगा कि अमेरिका को अपने कदम पर पछताना पड़े. ईरानी नेता ने देशभर में हो रही जनभागीदारी की भी सराहना की और कहा कि मजदूरों से लेकर कलाकारों तक हर वर्ग युद्ध के समर्थन में एकजुट है, जिससे देश की स्थिति और मजबूत हुई है.

वहीं, अमेरिकी सैन्य तैयारियां इस टकराव के बढ़ने के खतरे को भी दिखाती हैं. किसी भी जमीनी अभियान में अमेरिकी सैनिकों को ड्रोन, मिसाइल हमलों और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड जैसी ताकतों के कड़े जवाबी हमले का सामना करना पड़ सकता है.

हालांकि डोनाल्ड ट्रंप पहले सैनिक भेजने को लेकर हिचकिचाहट जता चुके हैं, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि अगर कूटनीति नाकाम रही तो अमेरिका तनाव बढ़ाने के लिए तैयार है. ईरान ने भी साफ कर दिया है कि उसकी जमीन पर किसी भी हमले का जवाब बिना किसी सीमा के दिया जाएगा. ऐसे में आशंका है कि सीमित सैन्य कार्रवाई भी पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का रूप ले सकती है.

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