अमेरिका-ईरान जंग के एक महीने गुजर चुके हैं और यूद्ध की तपिश दूसरे देशों के रियल एस्टेट सेक्टर को भी अपने चपेट में ले चुका है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने न केवल कूटनीतिक समीकरण बदले हैं, बल्कि दुनिया भर के रियल एस्टेट सेक्टर को भी एक गहरे अनिश्चितता के में डाल दिया है.

2026 की शुरुआत में अमेरिकी हाउसिंग मार्केट रिकवरी की राह पर था, लेकिन जंग ने इस रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की वजह से बढ़ी अनिश्चितता ने मॉर्गेज रेट्स (Home Loan Rates) को सीधे तौर पर प्रभावित किया है. महंगाई बढ़ने के डर और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव ने कर्ज को महंगा कर दिया है.  संघर्ष शुरू होने के पहले ही हफ्ते में होम लोन के आवेदनों में 5% की गिरावट दर्ज की गई. मध्यम वर्ग के अमेरिकी खरीदार अब ऊंची ईएमआई के डर से घर खरीदने का फैसला टाल रहे हैं.

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दुबई: ‘सेफ हेवन’ की चमक पड़ी फीकी

दुबई, जिसे सालों से दुनिया भर के निवेशकों के लिए ‘सेफ हेवन’ माना जाता था, इस बार युद्ध की भौगोलिक निकटता के कारण दबाव में है. फरवरी के अंत में शुरू हुए तनाव के बाद दुबई के रियल एस्टेट मार्केट में भारी गिरावट देखी गई है. DXB Interact के डेटा के मुताबिक 28 फरवरी से 22 मार्च के बीच शहर में केवल 8157 डील हुए हैं. जो पिछले साल इसी अवधि में 12,196 था. यानी 33 फीसदी की गिरावट आई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान का संघर्ष है. अब खरीदार सावधानी बरत रहे हैं फिलहाल किसी भी सौदे से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

सालों बाद यह पहली बार है जब निवेशकों के मन में दुबई की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं, जिससे लग्जरी विला और वॉटरफ्रंट प्रॉपर्टीज की कीमतों में 4% से 5% तक की मामूली कटौती भी देखी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति मान रहे हैं, जहां विदेशी निवेशक अपनी पूंजी को लेकर सतर्क हो गए हैं.

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भारत पर भी असर

वैश्विक स्तर पर फैली इस अशांति से भारतीय रियल एस्टेट बाजार भी अछूता नहीं रहा है. प्रमुख रियल एस्टेट कंसल्टेंसी ‘ANAROCK’ की मार्च 2026 की रिपोर्ट (Q1 2026) भारत के लिए चिंताजनक आंकड़े पेश करती है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टॉप 7 शहरों में घरों की बिक्री में पिछली तिमाही (Q4 2025) के मुकाबले 7% की गिरावट आई है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने सीमेंट, स्टील और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ा दी है, जिससे बिल्डरों के लिए प्रोजेक्ट समय पर पूरा करना और कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो रहा है.

निवेशकों का पीछे हटना: मध्य पूर्व (Middle East) में रहने वाले एनआरआई (NRI) भारतीय रियल एस्टेट के बहुत बड़े खरीदार हैं। युद्ध के बाद इस क्षेत्र के निवेशकों ने फिलहाल नए निवेश पर रोक (Pause Button) लगा दी है।

शहरों की बात करें तो चेन्नई में सबसे ज्यादा 18% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मुंबई (MMR) और बेंगलुरु में भी बिक्री में 5% से 6% की कमी आई है. दिलचस्प बात यह है कि जहां बिक्री कम हुई है, वहीं नई लॉन्चिंग (New Supply) में 2% की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जिससे अनसोल्ड इन्वेंट्री (बिना बिके घर) बढ़कर 6 लाख यूनिट्स के पार पहुंच गई है.

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