ईरान जंग में चौधरी बना PAK अब अपनी लड़ाई सुलझा रहा, चीन की शरण में पहुंचा! – Pakistan Afghanistan talks in China taliban ishaq dar iran war mediation ntcppl


मात्र दो दिन पहले तक ईरान की जंग सुलझाने के लिए मध्यस्थता कर रहा पाकिस्तान अब अपनी लड़ाई को लेकर टेंशन में है और बातचीत की टेबल पर बैठा है. पाकिस्तान चीन में तालिबान के साथ बातचीत कर रहा है. तालिबान और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से लगातार लड़ाई चल रही है. इस जंग में 400 से ज्यादा अफगानी मारे गए हैं. पाकिस्तान का भी बड़ा नुकसान हुआ है. इस वार्ता के लिए पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार कल ही चीन पहुंचे हैं.

ईरान जंग में पाकिस्तान खुद को अहम खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने   दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने और वार्ता का रास्ता खोलने की पुष्टि की है.

इसी सिलसिले में इस्लामाबाद में पाकिस्तान ने सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्री पहुंचे थे. इस दौरान गिरने से पाकिस्तान के विदेश मंत्री के कंधे में फ्रैक्चर भी हो गया था.

इसके बाद अगले दिन पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार चीन की यात्रा पर गए थे. तब ये कहा जा रहा था कि ये ईरान वार्ता को सुलझाने के लिए पाकिस्तान की ओर से की जा रही अगली कोशिश है.

लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि पाकिस्तान चीन में अपनी लड़ाई सुलझाने के लिए तालिबान से बात कर रहा है.

अफगानिस्तान की ओर से इस बातचीत में कई संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं. इनमें विदेश मंत्रालय से मोहिबुल्लाह वासिक और अब्दुलहाई क़ानित, गृह मंत्रालय से आरिफुल्लाह, रक्षा मंत्रालय से रुहुल्लाह उमर और जनरल डायरेक्टरेट ऑफ इंटेलिजेंस से याह्या तकल प्रमुख हैं.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान की ये शांति वार्ता वार्ता चीन के उरुमची में बीजिंग की मेज़बानी में हो रही है.

इस बीच पाकिस्तानी पक्ष ने अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नामों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें उप-स्तरीय अधिकारी शामिल हैं.

अब तक न तो इस्लामिक अमीरात और न ही पाकिस्तान सरकार ने इन वार्ताओं के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है.

इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य सीजफायर और सीमा पर हिंसा रोकना है. पाकिस्तान की सबसे बड़ी मांग है कि अफगान तालिबान TTP के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे. वहीं काबुल का कहना है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं हो रहा है. चीन इस प्रक्रिया में इसलिए सक्रिय है क्योंकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ही देशों पर चीन की डिप्लोमेसी की अच्छी खासी पकड़ है.

चीन की मध्यस्थता से शुरू हुई उरुमकी वार्ता फिलहाल तनाव कम करने की कोशिश है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक है. अगर TTP पर कोई ठोस समझौता नहीं होता तो पाकिस्तान-तालिबान टकराव फिर बढ़ सकता है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हाल के वर्षों में कई दौर की वार्ताएं हुई हैं, लेकिन अधिकांश बातचीत सीमा विवाद और TTP (तहरीक-ए-के मुद्दे पर अटकती रही है.

1. दोहा युद्धविराम वार्ता

अक्टूबर 2025 में सीमा पर भारी झड़पों के बाद कतर की मध्यस्थता में दोहा में युद्धविराम हुआ. इसका उद्देश्य डूरंड लाइन पर संघर्ष रोकना और बातचीत की प्रक्रिया शुरू करना था, लेकिन यह समझौता लंबे समय तक टिक नहीं सका.

2. इस्तांबुल वार्ता

इसके वार्ता के फेल होने के तुरंत बाद तुर्किये के इस्तांबुल में पाकिस्तान-तालिबान के बीच कई दिनों तक बातचीत चली. इस दौरान पाकिस्तान ने TTP पर कार्रवाई की मांग की. लेकिन अफगान पक्ष ने इसे पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया. इस कारण कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया.

इसके अलावा सऊदी-कतर और तुर्की ने भी मध्यस्थता का प्रयास किया लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद चीन की मध्यस्थता में ये वार्ता हो रही है.

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