लखनऊ में राजस्व परिषद से अटैच आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने 26 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आईएएस पद से तकनीकी इस्तीफे की अनुमति मांगी है. रिंकू राही पिछले आठ महीनों से बिना किसी निर्धारित जिम्मेदारी के तैनात हैं और बिना काम किए वेतन लेने को नैतिक रूप से गलत मान रहे हैं. उन्होंने अपनी कार्यशैली और जवाबदेही को मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के लिए ‘अनुपयुक्त’ बताया है. पीसीएस अधिकारी रहते हुए करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश करने पर उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसमें उन्हें गोली लगी थी. अब वह वापस अपनी मूल सेवा पीसीएस में लौटने की इच्छा रखते हैं.

कांग्रेस ने उठाया सवाल: क्या दलित होने की सजा मिल रही?

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कांग्रेस एससी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिंकू राही के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि एक ईमानदार अधिकारी को उसकी ईमानदारी के लिए बार-बार तबादलों और खाली बैठने की सजा दी जा रही है. गौतम ने सवाल किया कि क्या देश में ईमानदार अधिकारियों की जरूरत नहीं है?

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उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की है कि राही का इस्तीफा मंजूर न किया जाए और उत्तर प्रदेश सरकार को उन्हें उचित कार्य आवंटित करने का निर्देश दिया जाए. कांग्रेस का आरोप है कि दलित अधिकारियों को व्यवस्था में संघर्ष करना पड़ रहा है.

‘सिस्टम से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं’

अपने फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए रिंकू राही ने कहा कि उनका कदम सार्वजनिक सेवा छोड़ने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह केवल एक तकनीकी प्रक्रिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से किसी अवसाद या उत्पीड़न का शिकार नहीं हैं क्योंकि वह पहले ही जीवन का सबसे बुरा दौर देख चुके हैं. राही के अनुसार, वह संवैधानिक व्यवस्था को बेहतर मानते हैं और उनका मानना है कि कमियों को सुधारा जा सकता है. वह बस ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहते जहां उनके पास कोई ठोस जिम्मेदारी न हो और वह सरकारी लाभ ले रहे हों.

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घोटाले के खुलासे के बाद हुआ था जानलेवा हमला

रिंकू सिंह राही की कहानी राष्ट्रीय सेवा और साहस की मिसाल रही है. पीसीएस अधिकारी के तौर पर उन्होंने एक बड़े घोटाले को उजागर किया था, जिसके बाद उन पर हमला हुआ. स्वस्थ होने के बाद उन्होंने कड़ी मेहनत की और आईएएस अधिकारी बने.

हालांकि, पदोन्नति के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण पदों से दूर रखा गया. वर्तमान में वह लखनऊ में राजस्व परिषद से जुड़े हैं, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट कार्यभार नहीं है. इसी गतिरोध के चलते उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अपनी पीड़ा साझा की है और तकनीकी इस्तीफे का विकल्प चुना है.

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