सुबह के 6 बजे… जब दुनिया शांत होती है. कहीं कॉफी बन रही होती है, तो कहीं लोग अलार्म बंद कर रहे होते हैं. करोड़ों प्रोफेशनल्स के लिए यह दिन का सबसे सुकून भरा और निजी समय होता है. लेकिन अब, यही समय सबसे क्रूर साबित हो रहा है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. इसमें दावा किया गया है कि छंटनी जानबूझकर सुबह 6 बजे की जाती है क्योंकि उस वक्त लोग अकेले होते हैं. यह पोस्ट किसी कॉर्पोरेट मेमो जैसी नहीं, बल्कि मॉडर्न वर्कफोर्स मैनेजमेंट के उस ठंडे ब्लूप्रिंट की तरह है, जहां ‘समय’ एक रणनीति है और ‘अकेलापन’ एक सोची-समझी साजिश. भले ही इस पोस्ट की आधिकारिक पुष्टि न हुई हो, लेकिन इसने जिस बेचैनी को जन्म दिया है, वह बेहद असली महसूस होती है.

छंटनी का नया लॉजिक: अकेलेपन की रणनीति

इसके पीछे का विचार सरल और सिहरन पैदा करने वाला है. सुबह 6 बजे आपके पास कोई सहकर्मी नहीं होता जिससे आप बात कर सकें. न कोई गलियारों में होने वाली फुसफुसाहट और न ही आपसी एकजुटता दिखाने का मौका.

आपके पास होती है तो सिर्फ एक स्क्रीन और एक ऐसा वाक्य, जो आपकी दुनिया बदल देता है.

वायरल पोस्ट के मुताबिक, इसका कारण बहुत स्पष्ट है. जब कर्मचारियों को यह खबर अकेले में मिलती है, तो वे इसे अकेले ही झेलते हैं. जब तक वे किसी से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तब तक उनके लॉगिन बंद कर दिए जाते हैं, एक्सेस छीन लिया जाता है और कंपनी आगे बढ़ चुकी होती है. यह सिर्फ बुरी खबर देने के बारे में नहीं है, बल्कि उसके बाद होने वाले हंगामे को कंट्रोल करने के बारे में है.

10 मिनट का वो झटका जो करियर बदल देता है
टेक इंडस्ट्री (जैसे ओरेकल) में छंटनी का एक तय पैटर्न देखा गया है: सुबह-सुबह ईमेल आना और तुरंत सिस्टम एक्सेस बंद कर देना. वायरल पोस्ट में एक ’12 मिनट के विंडो’ का जिक्र है, वह समय जब आप छंटनी का ईमेल पढ़ते हैं और ऑफिस सिस्टम में लॉगिन करने की कोशिश करते हैं.

इसी छोटे से अंतराल में आपकी पहचान मिटा दी जाती है. आप अब कर्मचारी नहीं रहे, आप कंपनी के लिए एक ‘लायबिलिटी’ (बोझ) बन जाते हैं जिसे तुरंत हटाना जरूरी है.

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AI के लिए इंसानों की बलि?
विडंबना देखिए, जिस वर्कफोर्स ने एंटरप्राइज सिस्टम, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेशन टूल्स बनाए, आज वही सिस्टम उनकी जगह ले रहे हैं. ओरेकल जैसी कंपनियां AI और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, और उस खर्च की भरपाई के लिए इंसानी कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है. आज ‘एफिशिएंसी’ का मतलब कर्मचारियों की मदद करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों की जरूरत को ही खत्म करना हो गया है.

क्यों सुबह 6 बजे का समय ज्यादा दर्दनाक है?
छंटनी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका अनुभव बदल गया है. पहले छंटनी के लिए आमने-सामने मीटिंग होती थी या मैनेजर से बात होती थी.  लेकिन अब ये फॉर्म भी सामने आ रहे हैं.

एसिंक्रोनस (Asynchronous): यानी कोई सीधा संवाद नहीं.
आइसोलेटेड (Isolated): यानी आप बिल्कुल अकेले होते हैं.
डिजिटल एक्जीक्यूशन: यानी सब कुछ सॉफ्टवेयर के जरिए.

सुबह 6 बजे का समय इस अलगाव को और बढ़ा देता है. दिन शुरू होने से पहले ही आपके इनबॉक्स में एक नोटिफिकेशन आता है और वर्कप्लेस कम्युनिटी का भ्रम टूट जाता है.

डराने वाला समय
कंपनियों के लिए सुबह 6 बजे का समय ‘एफिशिएंट’ हो सकता है, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह वो समय है जब उनकी स्थिरता छीन ली जाती है. शायद इसीलिए यह कहानी लोगों के दिल को छू गई है. कॉर्पोरेट जगत ने एक डरावना सबक सीख लिया है: अगर आप चाहते हैं कि कोई विरोध न हो, तो मैसेज तब भेजें जब जवाब देने के लिए कोई मौजूद न हो. अब सुबह 6 बजे सिर्फ एक समय नहीं, बल्कि एक ‘रणनीति’ बन चुका है.

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