मिडिल ईस्‍ट में जंग के बीच अमेरिका ने समुद्र में स्थित ईरानी तेल से प्रतिबंध हटाया है, जिस कारण भारत समेत कई देश ईरानी तेल खरीदने को तैयारी हैं. इसी बीच, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरानी तेल से भरा एक जहाज भारत की ओर आ रहा था, लेकिन ‘पेमेंट से जुड़ी दिक्‍कतों’ के कारण उसे चीन की ओर मोड़ दिया गया. हालांकि अब इसपर सरकार का जवाब आया है.

केंद्र सरकार ने कहा है कि ईरानी कच्चे तेल के एक कार्गो को ‘पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों’ की वजह से भारत के वडीनार से चीन की ओर मोड़े जाने की खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट असल में गलत हैं. भारत 40 से ज्‍यादा देशों से कच्चा तेल इंपोर्ट करता है, और कंपनियों को व्‍यापार के आधार पर अलग-अलग सोर्स और जगहों से तेल लेने की पूरी आजादी है.

मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावटों के बीच भारतीय रिफाइनरों ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतें पूरी कर ली हैं, जिसमें ईरान से आने वाला तेल भी शामिल है. बयान में आगे कहा गया कि ये अफवाह है कि पेमेंट की समस्‍या के कारण भारत आ रहा ईरानी जहाज चीन की ओर मुड़ा है. ईरानी कच्चे तेल के इंपोर्ट में पेमेंट से जुड़ी कोई रुकावट नहीं है और ना ही भारत आ रहा कोई जहाज चीन की ओर मुड़ा है.

व्‍यापार को बेहतर बनाने के लिए फैसले
मिनिस्‍ट्री ऑफ पेट्रोलियम और नेचुरल गैस की ओर से बयान में आगे कहा गया कि जहाज को मोड़ने के बारे में किए जा रहे दावे इस बात को नजरअंदाज करते हैं कि तेल का व्यापार कैसे काम करता है. बिल ऑफ लैडिंग में अक्सर जहाज से माल उतारने के लिए संभावित बंदरगाहों के नाम लिखे होते हैं, और समुद्र में चल रहे कार्गो व्यापार को बेहतर बनाने और ऑपरेशनल फ्रीडम के आधार पर यात्रा के बीच में ही अपना रास्‍ता बदल सकते हैं.

अफवाहों पर ध्‍यान मत दें
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि यह फिर से दोहराया जाता है कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की जरूरतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं. LPG के मामले में भी, कुछ दावे गलत हैं, क्योंकि LPG जहाज ‘सी बर्ड’, जिसमें लगभग 44 TMT ईरानी LPG लदी थी, 2 अप्रैल को भारत के मैंगलोर बंदरगाह पर पहुंचा और अभी वहां माल उतार रहा है. बयान में कहा गया कि इन अफवाहों पर ध्‍यान देने की जरूरत नहीं है.

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