‘राजनीतिक दबाव से दूर रहें संस्थाएं, तभी चुनाव रहेंगे निष्पक्ष’, बोलीं जस्टिस नागरत्ना – justice bv nagarathna election commission autonomy democracy constitutional institutions independence statement NTC agkp

ByCrank10

April 4, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


सुप्रीम कोर्ट की भावी चीफ जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और विवेक पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि निर्वाचन आयोग और कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल जैसी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है.

इन संस्थाओं की निष्पक्षता राजनीतिक प्रभाव से प्रभावित हो सकती है. इनके राजनीतिक प्रभाव या दबाव में ना आने से लोकतंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहती है. इन संस्थाओं के अलावा वित्त आयोग जैसी अन्य नियामक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक निष्पक्षता भी लोकतंत्र के लिए काफी अहम है.

पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के समारोह में डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मारक व्याख्यान में कहा कि संविधान निर्माताओं ने काफी सोच-विचार और बहस के बाद इन संस्थाओं को स्वायत्त और राजनीतिक प्रभाव से सर्वथा मुक्त रखा.

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि निर्वाचन आयोग से संबंधित प्रावधानों के अनुच्छेद 324 में दिए गए अधिकारों के तहत सिर्फ चुनाव ही नहीं कराता, बल्कि उसकी निष्पक्षता पर ही चुनावों की शुचिता बनती और बढ़ती है.

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चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली राजनीतिक घटना भर नहीं है. यह तो ऐसा तंत्र है जिससे राजनीतिक सत्ता बनती और बिगड़ती है.

हमारे संवैधानिक लोकतंत्र ने यह भली-भांति सिद्ध किया है कि समय पर चुनाव होने के कारण सरकार में परिवर्तन सुचारू रूप से होते हैं. इस प्रक्रिया पर नियंत्रण का अर्थ, वास्तव में, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की शर्तों पर ही नियंत्रण हो जाना होता है.

जस्टिस नागरत्ना ने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय का हवाला भी दिया. उन्होंने टी. एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को एक बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था के रूप में मान्यता दी.

आयोग को चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया. ऐसे में उसे उन दायित्वों पर खरा उतरने की पूरी प्रक्रिया में शुचिता और पारदर्शिता दिखनी चाहिए.

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