ग्राउंड रिपोर्ट: स्कूल और कम्युनिटी सेंटर बने विस्थापितों का आसरा… लेबनान के बेका में इजरायली बमबारी से भारी तबाही – lebanon bekaa valley ground report israel airstrikes civilian crisis displacement humanitarian emergency conflict impact NTC AGKP

ByCrank10

April 5, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


पूर्वी लेबनान की बेका घाटी इन दिनों दहशत के साये में है. यहां इजरायल के हवाई हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं और इनकी आवाजें अब इस घाटी की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं.

इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह सीरिया से जुड़े रास्तों के जरिए इसी घाटी से हथियार मंगवाता है. इन्हीं रूट्स को तबाह करने के मकसद से इजराइली वायुसेना यहां लगातार बमबारी कर रही है.

लेकिन इन हमलों की सबसे बड़ी और सबसे दर्दनाक मार पड़ रही है यहां के आम लोगों पर, जो न किसी जंग का हिस्सा हैं और न किसी सियासत को समझते हैं.

पहले दक्षिण लेबनान से परिवार उजड़ रहे थे. अब यही सिलसिला बेका घाटी में भी शुरू हो गया है. सड़कों पर लोग अपना जरूरी सामान उठाए निकलते दिख रहे हैं. जो जहां जा सकता है, जा रहा है.

बच्चे, बूढ़े, औरतें सब घर छोड़कर निकल पड़े हैं. इलाके के स्कूल और कम्युनिटी सेंटर इन विस्थापित परिवारों से पूरी तरह भर चुके हैं. जिन क्लासरूम में कभी पढ़ाई होती थी, आज वहां बिस्तर बिछे हैं और परिवार सिमटकर बैठे हैं. हर चेहरे पर थकान है, डर है और एक अजीब सी बेबसी है जो शब्दों में बयान नहीं होती.

यह भी पढ़ें: खंडहर बनीं इमारतें, टेंट में बचपन और सुबकती जिंदगियां… तस्वीरों में देखें इजरायली हमलों के बाद लेबनान के हालात

लेबनान के सोशल वेलफेयर मंत्रालय का कहना है कि इमरजेंसी सपोर्ट दी जा रही है और हर संभव मदद की कोशिश हो रही है. लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है.

विस्थापितों की तादाद इतनी तेजी से बढ़ रही है कि सरकारी संसाधन बुरी तरह कम पड़ रहे हैं. राहत सामग्री नाकाफी है, दवाइयों की किल्लत है और रहने की जगह भी अब सीमित होती जा रही है. जो लोग मदद के लिए यहां आए थे, उनके चेहरे पर भी जवाब न मिलने की थकान साफ नजर आती है.

स्थानीय अधिकारियों ने साफ और कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर इजरायली हमले इसी तरह जारी रहे तो हालात और कहीं ज्यादा भयावह हो जाएंगे. और भी ज्यादा नागरिक इसकी चपेट में आएंगे. पहले से दबाव में चल रहा बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है. अस्पताल, सड़कें, पानी और बिजली की आपूर्ति, सब कुछ खतरे में है.

बेका घाटी इस वक्त एक बड़े इंसानी संकट के मुहाने पर खड़ी है. यहां की जमीन पर जो दर्द बिखरा हुआ है, वो किसी सरकारी बयान में नहीं दिखता.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *