यूपी समाचार: रामपुर के एक साधारण परिवार का बेटा शावेज बेहतर रोजगार की तलाश में रूस गया था, लेकिन किस्मत उसे ऐसी जगह ले गई जहां से वह जिंदा वापस नहीं लौट सका. करीब 9 महीने पहले 22 वर्षीय शावेज अपने परिवार का सहारा बनने के इरादे से रूस गया था. वह वहां स्टील फर्नीचर का काम करने लगा था. घरवालों को उम्मीद थी कि शावेज विदेश में काम करके उनकी आर्थिक स्थिति सुधार देगा, लेकिन रूस पहुंचने के महज 2 महीने बाद ही हालात बदल गए. आरोप है कि उसे जबरन रूस की सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया.
परिवार का कहना है कि शावेज ने फोन पर बताया था कि उसे मजबूरी में युद्ध क्षेत्र में जाना पड़ रहा है और वह वापस आना चाहता है, लेकिन उसके पास कोई रास्ता नहीं था. इसी बीच युद्ध के दौरान शावेज़ को गोली लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई. यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया. माता-पिता और परिजन गहरे सदमे में हैं. आज शावेज़ का पार्थिव शरीर रूस से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया. वहां से शव को रामपुर लाया गया हैं, जहां पूरे गांव में शोक का माहौल है.
इस मामले में मृतक के भाई साहबजादे ने बताया, ”15 जून 2025 को मेरा भाई रूस गया था घूमने के लिए. जब वहां पहुंच गया तो अच्छे से रह रहा था, हमारी बात भी होती थी. लेकिन जिस दिन से उसने यह खबर दी कि मैं आर्मी जॉइन कर रहा हूं, तो सिर्फ हमारी दो-तीन दिन बात हुई, वो भी रिकॉर्डिंग के जरिए. 5 सितंबर को मेरे भाई से आखिरी बात हुई थी, वह भी कॉल पर नहीं हुई थी, भाई ने वॉइस भेजी थी. उस दिन से आज 7-8 महीने हो गए, कोई बात नहीं हुई थी. अब परसों हमें पता चला, एक कॉल आई. उन्होंने कहा कि शावेद कौन है? मैंने कहा कि मेरा भाई है. तो उन्होंने कहा कि वह फौत हो गया है आर्मी में. तो हमने पूछा कि कब फौत हो गया? तो उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को हो गया था. मैंने उससे कहा कि 7 महीने बाद तुम अब बता रहे हो, तो उन्होंने कहा कि जैसे नंबर पर लाश आ रही है, वैसी बता रहे हैं.”
यह पूछे जाने पर कि क्या और भी लड़के साथ गए थे? इस पर मृतक के भाई ने बताया, ”यह मुझे कंफर्म नहीं है. हल्द्वानी का जो लड़का था वह आ गया था. वह भी इसलिए आ गया था क्योंकि 3 महीने में उसकी काफी गोलियां लगी थीं, बीमार था, मारने जा रहा था. उस लड़के ने मुझे बताया कि उन्होंने कहा कि तेरा यहां कोई काम नहीं है, तो उसे वापस भेज दिया.”
यह पूछे जाने पर कि फौज में कैसे भर्ती हुए? इस पर साहबजादे ने बताया, ”यह तो अब रूस की आर्मी जाने कि कैसे भर्ती कर लिए हमारे देश के लोगों को. सिर्फ हमारे देश के लोगों के साथ जुल्म क्यों? भारत सरकार से हमारी रिक्वेस्ट है कि जो भी और लोग वहां पर हैं उनकी जान की हिफाजत की जाए, उन्हें घर लाया जाए. हमारे भाई तो घूमने गए थे, उन्हें झांसा देकर आर्मी में भर्ती किया गया था.”
यह पूछे जाने पर कि कब गए थे घूमने? इस पर मृतक के भाई ने बताया, ”15 जून 2025 को गया था और सितंबर में इसने मुझे आर्मी के फोटो भेजे, वीडियो भेजी और कहा कि मैंने आर्मी जॉइन कर ली. उसके बाद मेरी कभी बात नहीं हो पाई, बस वॉइस भेजी थी. आखिरी वॉइस में यह कहा था कि मैं बहुत परेशान हूं, मेरे लिए दुआ करना. जो उन्होंने शर्तें रखी थीं, भाई ने कबूल कर लीं. मेरा भाई इंग्लिश जानता था, उन्होंने इंग्लिश में बताया और मेरे भाई मान गए. लेकिन जो उन्होंने साइन कराए वह रूस की भाषा में थे, तो रूस की भाषा मेरा भाई नहीं समझ पाया. बोला कुछ और था और कागज पर कुछ और था. फिर जब वह वहां पहुंचा तो वहां जाकर राजी नहीं था, वह रो रहा था. तो इससे जाहिर यह होता है कि जो मेरे भाई पर शर्तें रखी गई थीं, उन शर्तों पर खड़े नहीं उतरे. उन्होंने बताया कुछ और और करा कुछ और.”
यह पूछे जाने पर कि कब पता चला कि भाई की मौत हो गई? इस पर मृतक के भाई साहबजादे ने बताया, “परसों पता चला. 12 सितंबर 2025 में मौत हुई थी और 2 अप्रैल 2026 में बताया गया. यह बताया कि वह हमले में मारा गया है और डेथ सर्टिफिकेट उन्होंने व्हाट्सएप कर दिया है. हमारे ऊपर बहुत जुल्म हुआ है. हमारे भारत का अगर कोई भी नागरिक वहां फंसा हुआ है तो यह जुल्म उसके ऊपर नहीं होना चाहिए. वो 22 साल का लड़का था, अभी शादी नहीं हुई थी, जिम्मेदार लड़का था.”
शावेद की मां भूरी ने बताया, ”मेरा बेटा रूस गया था 10 महीने पहले. 2 महीने हॉस्टल में रहा, हमसे बात भी करता था, वीडियो कॉल भी करता था. 2 महीने तक सही रह रहा था. फिर पता नहीं क्या हुआ, किसने उसे बहकाया कि हम तुम्हें इतनी सैलरी देंगे, ₹50 लाख की सैलरी देंगे, 22 लाख रुपए तुम्हारे खाते में डालेंगे. हमारे बेटे ने हमें नहीं बताया, घर से डॉक्यूमेंट मंगा कर वहां का खाता खुलवाया. किसी को नहीं बताया कि वह खाता क्यों खुलवा रहा है. फिर कुछ दिन के बाद बताया कि मैंने ऐसा किया है. बेटा बोला पापा से कि कोई परेशानी नहीं है और यहां पर कोई रुपया नहीं आया. परसों हमारे पास कॉल आया और जब हम कॉल कर रहे थे तो कोई बात नहीं हो रही थी. मेरे बेटे पर तो फोन ही नहीं था, सिम ले ली थी उन्होंने. मैं अपना बेटा ही मांग रही हूं, मुझे मेरा बेटा चाहिए. मुझे दौलत नहीं चाहिए, मैं गरीबी उठा लूंगी, मेरा बेटा चाहिए.”
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