CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों के मन में जो डर था, वो लगभग खत्म हो गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बोर्ड परीक्षा प्रणाली में जो बदलाव हुए हैं, उसका सीधा उद्देश्य छात्रों के मानसिक तनाव को कम करना है. इस साल लागू दो बार बोर्ड परीक्षा का नियमों छात्रों को अपने मार्क्स में सुधार का अच्छा मौका देगा.  अब एक बार पेपर खराब होने का मतलब यह नहीं है कि आपका पूरा साल खराब हो जाएगा.

फेल करने के बजाय दिया दूसरा मौका

CBSE बोर्ड ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में छात्रों को फेल करने के बजाय उन्हें खुद को साबित करने और नंबरों में सुधार करने का दूसरा मौका दे रही है. बोर्ड ने सत्र 2025-26 के लिए अपने पैटर्न में बदलाव किया है. दो परीक्षाओं का विकल्प, ‘बेस्ट ऑफ टू’ का चयन और मुख्य विषयों में फेल होने पर ‘स्किल सब्जेक्ट’ के नंबरों का इस्तेमाल बच्चों के फेल होने के आशंका को बेहद कम कर सकता है.

क्या कोई छात्र हो सकता है फेल?

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बोर्ड परीक्षा में कोई छात्र फेल हो सकता है? तो बता दें कि अगर कोई स्टूडेंट फरवरी-मार्च में हुई बोर्ड परीक्षा में किसी भी कारण फेल हो जाता है तो उसके पास दूसरा मौका है. छात्र मई में  हुई आयोजित परीक्षा में अपने नंबर सुधार सकते हैं.

क्या है बेस्ट ऑफ टू नियम

वहीं, अगर कोई छात्र बोर्ड की ओर से आयोजित दोनों परीक्षा में शामिल होता है, तो मार्कशीट तैयार करते समय बोर्ड उस परीक्षा के नंबर जोड़ेगा जिसमें छात्र ने अच्छा प्रदर्शन किया है. मान लेते हैं कि फरवरी में परीक्षा में आपको कम नंबर मिले हैं और मई के परीक्षा में अच्छे नंबर मिले हैं, तो बोर्ड मई के नंबरों को मार्कशीट में लिखेगा.

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स्किल सब्जेक्ट का भी मिलेगा फायदा

बोर्ड का बेस्ट ऑफ फाइव नियम भी छात्रों को फायदा देता है. मान लेते हैं कि छात्र मैथ्स और साइंस जैसे किसी विषय में 33 प्रतिशत मार्क्स नहीं ला पाते हैं, तो छठे विषय के रूप में स्किल सब्जेक्ट (जैसे AI या IT) लिया है तो फेल वाले विषय की जगह स्किल सब्जेक्ट के नंबर जुड़ जाएंगे और वे पास हो जाएंगे.

कब माना जाएगा फेल?

छात्र बोर्ड परीक्षा में तब फेल माना जाएगा जब वह पहली परीक्षा में 3 से ज्यादा विषयों में अनुपस्थित रहे और मई में परीक्षा देने के बाद भी वह 5 विषयों में 33 प्रतिशत न ला पाए, तो वह फेल हो जाएंगे. हालांकि, अब 3 मुख्य विषयों तक सुधार का मौका मिलता है, इसलिए पूरी तरह फेल होने वालों की संख् बहुत कम होगी.

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