24 घंटे में ट्रंप का यू-टर्न, सभ्यता मिटाने की धमकी के बाद ईरान को रिकंस्ट्रक्शन में मदद – Iran Ceasefire America Israel War Donald Trump Tehran Reconstruction mrnd


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महज 24 घंटे के भीतर अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए ईरान के पुनर्निर्माण में मदद करने का ऐलान कर दिया है. यह वही ट्रंप हैं, जिन्होंने एक दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो “पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है.” उनके इस बयान ने दुनिया भर में डर और चिंता पैदा कर दी थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं.

सीजफायर के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह “विश्व शांति के लिए बड़ा दिन” है. उन्होंने लिखा कि ईरान अब शांति चाहता है और अमेरिका उसकी मदद के लिए तैयार है. ट्रंप ने साफ कहा, “ईरान अब अपने पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है और अमेरिका हर तरह की सप्लाई भेजेगा, ताकि हालात सामान्य हो सकें.”

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान नहीं, चीन बना सीजफायर का सूत्रधार… जानें कैसे रुकी अमेरिका-ईरान की जंग

राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि जंग के बाद अब दोनों देश बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं. खास बात यह है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी अमेरिका का रुख नरम पड़ा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वहां ट्रैफिक को सामान्य बनाने में मदद करेगा और सुनिश्चित करेगा कि सब कुछ ठीक तरीके से चले.

सभ्यता मिटाने की धमकी के बाद ट्रंप का यू-टर्न!

इस पूरी घटना को ट्रंप का बड़ा “यू-टर्न” माना जा रहा है क्योंकि जहां एक तरफ वह ईरान पर बड़े हमले की बात कर रहे थे, वहीं अब वह उसे “गोल्डन एज ऑफ मिडिल ईस्ट” की तरफ बढ़ता हुआ बता रहे हैं. दरअसल, इस बदलाव के पीछे ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव भी अहम माना जा रहा है. इस प्रस्ताव में ईरान ने साफ शर्तें रखी थीं, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण बनाए रखना, यूरेनियम संवर्धन जारी रखना, सभी तरह के प्रतिबंध हटाना और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई जैसी शर्तें शामिल थी.

ईरान जंग में ट्रंप ने किया जीत का दावा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने इन शर्तों को पूरी तरह तो नहीं, लेकिन काफी हद तक स्वीकार कर लिया है. यही वजह है कि अब वह खुद को “पूरी और पूर्ण जीत” का दावा भी कर रहे हैं. एक न्यूज एजेंसी एएफपी से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लिया है और अब शांति समझौता अंतिम चरण में है. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को किसी न किसी तरह नियंत्रित किया जाएगा, लेकिन इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी.

यह भी पढ़ें: क्या ईरान खोलेगा होर्मुज स्ट्रेट? जानें जहाजों की आवाजाही पर टोल लगेगा या नहीं

अमेरिका में चुना, इसलिए तो नरम नहीं पड़े ट्रंप?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यू-टर्न सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी हो सकता है. अमेरिका में चुनावी माहौल गर्म है और इस जंग के कारण ट्रंप की लोकप्रियता पर असर पड़ा है. ऐसे में शांति का संदेश देना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है. दूसरी तरफ, ईरान भी लगातार दबाव में था. आर्थिक संकट, सैन्य नुकसान और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उसे भी बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह शांति स्थायी होगी या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी विराम है. फिलहाल, दोनों देशों के बीच दो हफ्तों का सीजफायर लागू है, जिसके दौरान बातचीत जारी रहेगी. इस पूरी घटना ने एक बात साफ कर दी है. जंग जितनी तेजी से भड़कती है, उतनी ही तेजी से राजनीतिक फैसले उसे बदल भी सकते हैं. 24 घंटे में धमकी से मदद तक का यह सफर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *