भारत में इलेक्ट्रिक कारों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इस रेस में दुनिया की दिग्गज कंपनी Tesla की रफ्तार कुछ सुस्त नजर आ रही है. जिस कंपनी ने दुनिया भर में अपने इलेक्ट्रिक कारों से EV बाजार को हिला रखा हो, वही भारत में खरीदारों के लिए तरसती दिख रही है. आंकड़े चौंकाने वाले हैं… 8 महीनों में 350 से भी कम कारों की बिक्री. सवाल उठता है कि आखिर टेक्नोलॉजी और ब्रांड वैल्यू के बावजूद Tesla भारत में पकड़ क्यों नहीं बना पा रही है.
पिछले साल जुलाई में टेस्ला ने बड़े ही जोर-शोर के साथ भारत में एंट्री का ऐलान किया. मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में कंपनी का भव्य शोरूम शुरू किया गया, जिसका उद्घाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद फीता काट कर किया. शोरूम के शुभारंभ के साथ ही कंपनी ने भारत में अपनी पहली कार Model Y को भी लॉन्च किया, जिसकी शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, मुंबई) तय की गई. कंपनी ने सितंबर-25 से कारों की बिक्री शुरू की.
अब तकरीबन 7 महीने (सितंबर-25 से मार्च-26 तक) बीत जाने के बाद भी टेस्ला की कुल बिक्री बहुत ही कम है. फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि, टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (Tesla India) ने बीते फाइनेंशियल ईयर (FY-26) में कुल 342 कारों की बिक्री की है. इस हिसाब से औसतन हर महीने देश भर में 43 कारों की बिक्री हुई है.
वहीं दूसरे इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माताओं के लिए बीता वित्त वर्ष काफी शानदार रहा है. वित्त वर्ष-26 में टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, पैसेंजर व्हीकल और कमर्शियल व्हीकल, इन सभी सेगमेंट्स को मिलाकर कुल EV रिटेल लगभग 24.52 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया. यह सालाना आधार पर करीब 24.6% की मजबूत बढ़त है. इसका मतलब साफ है कि हर सेगमेंट में डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिली, जो EV सेक्टर के लिए बेहद बड़ा संकेत है.
केवल इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट की बात करें तो इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखा गया है. FY’26 में EV पैसेंजर व्हीकल 83.63% की ग्रोथ के साथ 1,99,923 यूनिट्स तक पहुंच गए. यह आंकड़ा 2 लाख के बेहद करीब है, जो दिखाता है कि अब देश भर में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. जहां देश भर में पूरे फाइनेंशियल ईयर में 2 लाख इलेक्ट्रिक कारें बेची जा रही हों वहां टेस्ला का बमुश्किल 342 कारें बेच पाना कंपनी के लिए चिंता का विषय है.
भारत में Tesla की चुनौती
टेस्ला के लिए भारत में सबसे बड़ी चुनौती इसकी कीमत बन रही है. Model Y की कीमत भारत में लगभग 60–70 लाख रुपये के आसपास है. यह कीमत अमेरिका में बेचे जाने वाले इसी मॉडल के मुकाबले करीब 70% तक ज्यादा है, जिसका बड़ा कारण भारी इंपोर्ट ड्यूटी (70–100% तक) है. भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव मार्केट में इतनी महंगी कार केवल एक छोटे लग्जरी ग्राहक वर्ग तक सीमित रह जाती है. क्योंकि भारत में लग्ज़री कारों का मार्केट शेयर ही महत 1% है. ऐसे में Tesla ‘मास ब्रांड’ नहीं बन पाई, बल्कि ‘निश (Niche)’ प्रोडक्ट बनकर रह गई.
Tesla अभी भारत में गाड़ियां बनाती नहीं, बल्कि इंपोर्ट करती है. यहा बेची जाने वाली मॉडल वाई को चीन के शंघाई में स्थित गिगा फैक्ट्री से इंपोर्ट कर भारत लाया जाता है. ये कार कम्पलीट बिल्ट यूनिट (CBU) रूट ये इंडिया आती है. टेस्ला की ये गिगा फैक्ट्री पूरे एशिया और यूरोपीय बाजार के लिए सबसे बड़ा इंपोर्ट हब है. इंपोर्टेड मॉडल पर लागत बढ़ती है, और इस कार को ‘मेक इन इंडिया’ का फायदा भी नहीं मिलता है. अगर लोकल प्रोडक्शन शुरू हो जाए, तो कीमत काफी कम हो सकती है.
लिमिटेड मॉडल पोर्टफोलियो
जहां भारत में कार बाजार तेजी से इलेक्ट्रिफाइड हो रहा है. दूसरे ब्रांड्स के पास तकरीबन हर ग्राहक वर्ग के लिए अलग-अलग व्हीकल ऑप्शन हैं. वहीं टेस्ला के पास केवल एक ही मॉडल है, जो लंबे समय से अपडेट नहीं हुआ है. ऐसे में कम फीचर्स के साथ केवल ब्रांड नेम के चलते ग्राहकों को जुटा पाना भी टेस्ला के लिए चुनौती है. दूसरी ओर टेस्ला के प्रतिद्वंदी जैसे BYD, विनफास्ट, मर्सिडीज बेंज, बीएमडब्ल्यू, वोल्वो, हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के पास तगड़ा EV पोर्टफोलियो है जो लगातार बढ़ रहा है. कई मामलों में ये कारें Tesla से सस्ती या ज्यादा फीचर-लोडेड भी हैं.
अच्छी तो है टेस्ला… फिर कमी कहां
टेस्ला ने ग्लोबल लेवल पर भले ही तगड़ा नाम कमाया हो. समय-समय पर एलन मस्क भी अपनी इस कार के फुली सेल्फ ड्राइव फीचर को खूब प्रमोट करते हैं. लेकिन अभी ये कार अपने दूसरे प्रतिद्वंदियों के मुकाबले फीचर में थोड़ी कम नज़र आती है. ख़ासतौर पर भारत में. क्योंकि यहां पर FSD फीचर के प्रयोग की अनुमति सरकार द्वारा नहीं दी गई है. हालांकि, भारत में अपने इस फीचर के लिए कंपनी 6 लाख रुपये तक चार्ज करती है. एक और चुनौती ग्राउंड क्लीयरेंस भी है, टेस्ला मॉडल वाई का ग्राउंड क्लीयरेंस 167 मिमी (6.58 इंच) है. जो कि भारतीय सड़कों के लिहाज से काफी कम है.
हालांकि टेस्ला भारत में लगातार अपने नेटवर्क विस्तार में लगा है. फिलहाल कंपनी की मौजूदगी दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे शहरों में है. टेस्ला ने हाल ही में नवी मुंबई के नेक्सस मॉल में अपना पहला इन-मॉल सुपरचार्जर स्टेशन भी लगाया है. जिसके बाद देश भर में कंपनी के कुल 5 चार्जिंग स्टेशन लग चुके हैं. जिसको लेकर कंपनी का दावा है कि, सुपरचार्जर की मदद से Model Y इलेक्ट्रिक कार को सिर्फ 15 मिनट में लगभग इतना चार्ज किया जा सकता है कि, यूजर को 275 किलोमीटर तक की रेंज मिलेगी.
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