अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर प्लान में एक ऐसा प्रावधान शामिल है, जिसके तहत ईरान और ओमान दोनों को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों पर ट्रांज़िट फ़ीस लगाने की अनुमति होगी. होर्मुज़ स्ट्रेट फ़ारस की खाड़ी का एक संकरा मुहाना है, जिससे दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुज़रता है.

34 किलोमीटर चौड़ा यह स्ट्रेट ओमान और ईरान दोनों के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है. इसे एक इंटरनेशनल जलमार्ग माना जाता रहा है और बीते वक्त में इन दोनों में से किसी भी देश ने इस पर कोई टोल नहीं लगाया था.

न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, तेहरान के अधिकारियों ने बताया कि ईरान इस फ़ंड का इस्तेमाल जंग के बाद के पुनर्निर्माण कार्यों के लिए करेगा, क्योंकि इस संघर्ष की वजह से देश के डिफेंस, प्रशासनिक और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है.

इस्लामाबाद में होगी आगे की बातचीत

अमेरिका और ईरान, दोनों ही बुधवार की सुबह 40 दिन से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए सीजफायर पर सहमत हो गए. इसके तहत तेहरान ने कुछ शर्तों के साथ उस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की सहमति दी, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग बंद ही था. इस जलमार्ग के बंद होने और यहां से गुज़रने वाले जहाज़ों पर हुए हमलों के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं.

आगे की चर्चाओं में होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य और लंबे वक्त तक शांति बनाए रखने के अन्य पहलू शामिल हैं. अमेरिका और इज़रायल के बीच होने वाली बातचीत में ये मुद्दे उठाए जा सकते हैं. यह बातचीत शुक्रवार को इस्लामाबाद में शुरू होने वाली है.

सीज़फ़ायर पर राज़ी होते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने 10-पॉइंट का एक प्रस्ताव पेश किया है, जो बातचीत के लिए एक कामयाब आधार है. उन्हें उम्मीद है कि दो हफ़्ते के अंदर यह समझौता पक्का हो जाएगा.

उन्होंने कहा, “हमें ईरान से 10-पॉइंट का एक प्रस्ताव मिला है और हमारा मानना ​​है कि यह बातचीत के लिए एक कामयाब आधार है. अमेरिका और ईरान के बीच पहले के करीब सभी विवादित मुद्दों पर सहमति बन गई है, लेकिन दो हफ़्ते का वक्त मिलने से यह समझौता पक्का और पूरा हो पाएगा.” उन्होंने बातचीत के किसी भी खास मुद्दे का ज़िक्र किए बिना यह बात कही है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ के प्रकार, उसमें लदे सामान और उस समय के दूसरे हालात के आधार पर ट्रांज़िट फ़ीस अलग-अलग होगी. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने पिछले हफ़्ते कहा था कि तेहरान इस मामले में ओमान के साथ मिलकर एक प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि इस कदम का मकसद ट्रांज़िट को रोकना नहीं, बल्कि उसे आसान बनाना है.

यह भी पढ़ें: हाफ सीजफायर… इधर ईरान-अमेरिका की जंग रुकी, उधर इजरायल ने लेबनान में की एयरस्ट्राइक

यूएई और कतर सहित खाड़ी देशों ने ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ रुख अपनाया है. उन्होंने स्वतंत्र और खुले समुद्री आवाजाही की मांग की है और कहा है कि वित्तीय तंत्रों पर किसी भी चर्चा को अभी टाल दिया जाना चाहिए.

समुद्र के कानून पर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून को कंट्रोल करने वाले संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के तहत होर्मुज स्ट्रेट (Straits) से सटे देश, केवल मार्ग देने के बदले में किसी भी प्रकार के भुगतान की मांग नहीं कर सकते. हालांकि, वे कुछ विशिष्ट सेवाओं, जैसे कि जहाज़ को रास्ता दिखाने (पायलटिंग), खींचने (टगिंग), या बंदरगाह सेवाओं के लिए सीमित शुल्क लगा सकते हैं. बशर्ते कि ये शुल्क किसी विशेष देश के जहाज़ों पर अन्य जहाज़ों की तुलना में अधिक न लगाए जाए.

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