अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और हाफ सीजफायर के बीच रूस की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. पूर्व रूसी राष्ट्रपति और रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर आगे कैसे चलेगा, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन एक बात तय है कि ईरान ने अपनी ताकत दिखा दी है.

मेदवेदेव ने तीखा बयान देते हुए कहा कि ईरान का असली परमाणु हथियार कोई पारंपरिक हथियार नहीं, बल्कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है. उनके मुताबिक, इस समुद्री मार्ग की क्षमता अपार है और यही ईरान का सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार बन चुका है. उनके मुताबिक इसका टेस्ट करके ईरान ने अपनी ताकत को सबको दिखा दिया है.

मेदवेदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर प्रस्ताव का विरोध किया है और पश्चिमी देशों की रणनीति पर सवाल उठाए हैं.

दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है. ऐसे में इस क्षेत्र पर नियंत्रण या व्यवधान का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच जंग के दौरान इस समुद्री मार्ग को लेकर हालात काफी बिगड़ गए थे. हमलों और तनाव के चलते यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली. ईरान ने यहां अपनी नाकेबंदी लगा दी है और दुश्मन देशों के कई जहाजों को तबाह कर दिया.

इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी सीजफायर जरूर हुआ है, जिसके तहत सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही फिर शुरू करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इसे बेहद नाजुक माना जा रहा है और किसी भी समय हालात फिर बिगड़ सकते हैं.

कुल मिलाकर, रूस का यह संदेश साफ है कि मौजूदा हालात में ईरान की ताकत सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि उसकी भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पकड़ है. यही कारण है कि यह इलाका अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा गेम चेंजर बन गया है.

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