ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि तेहरान में असली फैसले कौन ले रहा है. मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी ने सस्पेंस बढ़ा दिया है. इस बीच ईरान के प्रतिनिधि ने दावा किया है कि मोजतबा पूरी तरह सक्रिय हैं और हर फैसले पर नजर रख रहे हैं. उनके फैसलों की वजह से अमेरिका को झुकना पड़ा है.
इंडिया टुडे को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान इस युद्ध का विजेता बनकर उभरा है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि अंततः अमेरिका को हमारे सामने झुकना पड़ा. उनको युद्धविराम के लिए ईरान की सारी शर्तें माननी पड़ी है.
उनके ये बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने तक चले भीषण संघर्ष के बाद दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी है. इस जंग में 2000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद कहा कि उन्हें ईरान की तरफ से 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला, जिसके आधार पर युद्धविराम संभव हुआ.
इसके बदले में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अस्थायी रूप से खोलने पर सहमति दी, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम मार्ग है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि फैसले कौन ले रहा है. एक्सियोस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मोजतबा खामेनेई ही पर्दे के पीछे से बातचीत को आगे बढ़ा रहे थे.
अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों ने इसके उलट दावा किया है. उनका कहना है कि मोजतबा बेहोश हैं. किसी भी फैसले में शामिल नहीं हैं. इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए डॉ. इलाही ने कहा, “मोजतबा पूरी तरह स्वस्थ हैं. हर चीज की देखरेख कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में एक टीम काम कर रही है, जो सभी फैसले ले रही है.”
डॉ. इलाही ने यह भी दावा किया कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान न केवल डटा रहा, बल्कि हर तरफ जवाबी कार्रवाई जारी रखी. यही वजह है कि इस संघर्ष का असली विजेता ईरान ही है. उन्होंने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि न तो ईरान में सत्ता बदली और न ही देश का नक्शा. अमेरिका अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका.
ईरान ने अपनी शर्तों पर समझौता कराया है. इस पूरे संघर्ष में होर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम रणनीतिक बिंदु बनकर उभरा. ईरान ने साफ कर दिया कि इस जलमार्ग पर उसका नियंत्रण बना रहेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान यहां से गुजरने वाले सभी जहाजों से भारी भरकम ट्रांजिट शुल्क भी वसूल रहा है.
उन्होंने कहा कि ईरान इस रास्ते को अपने हितों के लिए सुरक्षित रखना चाहता है, ईरान नहीं चाहता कि दुश्मन इसका इस्तेमाल उसके खिलाफ करें. उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान भारत, इराक, चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे दोस्त देशों के तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी गई थी. मध्यस्थता को लेकर भी उन्होंने खुलासा किया.
उनका कहना है कि ईरान ने किसी देश से खुद मध्यस्थता की मांग नहीं की थी. हालांकि, पाकिस्तान समेत कुछ देशों ने पहल करते हुए दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने में भूमिका निभाई. युद्धविराम के बाद भी कई सवाल बाकी हैं, लेकिन इतना साफ है कि जंग के बीच ईरान अपनी रणनीतिक स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है.
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