AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका-ईरान सीजफायर पर कहा कि फॉरेन पॉलिसी, इंटर्नल सिक्योरिटी तीन घंटे का मजाक नहीं होता है. अगर कोई समझ रहा है कि होता है तो वो ठीक नहीं है. इस सीजफायर में जो भूमिका हमारे पड़ोसी मुल्क ने अदा की, जो कि एक फेल्ड स्टेट है. ये भूमिका हमें अदा करनी चाहिए थी.

उन्होंने कहा कि सीजफायर हुआ है. अच्छी बात है. मासूम लोगों की मौतें कम होंगी. अभी भी वक्त है कि हम बीजेपी सरकार से चाहेंगे कि लेबनान में जंगबंदी कराएं. खुलकर बोलिए कि लेबनान में इजराइल जो कर रहा है, वो गलत है. इजरायल ने लेबनान में बीस फीसदी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है. अगर हम ऐसे ही चुप बैठेंगे तो अक्साई चीन और पीओके कैसे वापस लेंगे.

ओवैसी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जो सीजफायर हुआ है, वो बहुत डेलीकेट है. हमारा मानना है कि हालिया वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध हुआ. इजरायल ने सात अक्टूबर के बाद गाजा में नरसंहार किया. अमेरिका-इजरयाल ने ईरान पर हमला किया. इन तीनों को देखें तो भारत ग्लोबल साउथ की एक बड़ी आवाज है. हमारे हमेशा से सभी के साथ अच्छे ताल्लुकात रहे हैं. लेकिन फिर भी हमने क्यों मध्यस्थता की भूमिका क्यों नहीं अदा की.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जिस समय इजरायल गए. उनकी टाइमिंग बहुत गलत थी. मोदी सरकार को समीक्षा करनी पडे़गी कि हम यह भूमिका अदा क्यों नहीं की. हम तो शुरुआत से ही निष्पक्ष रहे हैं. हमारी तो क्षमता रही है कि जब भी दो मालिक जंग करते हैं तो हम बिना किसी का पक्ष लिए उनकी बात कराते हैं. ईरान तो हमारा बड़ा करीब रहा है. होर्मुज बंद होने से हमें ज्यादा तकलीफ हुई. लेकिन अब सीजफायर से उम्मीद है कि गैस संकट में कमी आएगी.

ओवैसी ने कहा कि नेतन्याहू को भारत आना था लेकिन पीएम मोदी इजरायल गए. उनके इजरायल जाने से संदेश गया कि हम उनके साथ खड़े हैं. मोदी के इजरायल दौरे के बाद ईरान पर अटैक हुआ. लेकिन हमने संवेदना व्यक्त करने में पांच दिन लगा दिए.

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