लेबनान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब भीषण रूप अख्तियार कर चुकी है. बुधवार को लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वे दिल दहला देने वाले हैं. 24 घंटों में हुए इजरायली हमलों में 89 लोगों की जान चली गई है, जबकि 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं.

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, देश के तमाम अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं और चिकित्सा व्यवस्था चरमराने की कगार पर है. इस खूनी संघर्ष के बीच अमेरिका की ओर से एक स्पष्टीकरण सामने आया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने ‘एक्सियोस’ से बातचीत की है.

उन्होंने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया संघर्ष विराम समझौते से लेबनान का कोई लेना-देना नहीं है. अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई उस समझौते के दायरे से बाहर है, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी थी. ईरान ने कड़ा एतराज जताया है.

ईरान की न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ ने सूत्र के हवाले से दावा किया है कि यदि लेबनान पर इजराइली हमले नहीं थमे, तो वो मौजूदा संघर्ष विराम समझौते से पीछे हट जाएगा. ये धमकी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह युद्ध बड़ा रूप ले सकता है, जिसमें ईरान सीधे तौर पर कूद सकता है.

इसका प्रभाव अब समुद्री व्यापारिक रास्तों तक भी पहुंच गया है. शिपिंग सूत्रों के हवाले से खबर है कि ईरानी नौसेना ने एक आधिकारिक संदेश जारी कर जहाज मालिकों को चेतावनी दी है. ईरान ने कहा है कि संबंधित समुद्री रास्तों से गुजरने वाले हर जहाज को अब तेहरान से अनुमति लेनी होगी.

इस संदेश में कहा गया है कि बिना अनुमति के होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जाएगा. हमला करके उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा. इस कदम से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. अभी तक इस पर अमेरिकी की प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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