सायरन के शोर से राहत और सीजफायर की पहली सुबह, तेल-अवीव से आंखों देखी रिपोर्ट – America iran ceasefire israel mimouna morning peace war stop aankhon dekhi ntc ntyv iwth


इजरायल में जब भी लोग मिलते हैं तो आपस में शलोम कहते हैं. शलोम का हिंदी में अर्थ होता है शांति. यहूदी  पासओवर त्योहार के आखिरी दिन यानी मिमोना की सुबह इजराइल के लिए वाकई शांति लेकर आई. सुबह की किरण से पहले तेल-अवीव आसमान में मिसाइल-इंटरसेप्शन के धमाकों की आवाज के थर्रा रहा था. पूरी रात रह-रहकर सायरन बज रहे थे.

खबरों को ट्रैक करते रहने और सुबह से लाइव खड़े होने की टाइमलाइन के कारण यूं तो नींद आ नहीं रही थी. वहीं 7 अप्रैल की मध्यरात्रि के बाद से थोड़ी-थोड़ी देर में बज रहे सायरन और अलर्ट की आवाज ने कुछ देर झपकी लेने की संभावना को भी खत्म कर दिया. कुछ देर के लिए तो लग रहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल की सेनाएं ईरान में विध्वंस करेंगी तो ईरान अपने मिसाइल जखीरे के सारे तीर चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. यानी कूटनीतिक समाधान की सारी संभावनाओं की आहुति देते हुए युद्ध बेहद भयानक मोड़ पर पहुंच रहा है.

मन में कई तरह के विचार चल रहे थे. धमाकों की जगह पर पहुंचकर रिपोर्ट करने की तैयारी के साथ-साथ सोच रहा था कि कुछ ही घंटे पहले जो अपने टीवी लाइव में कहा, क्या वो गलत साबित हो जाएगा?… कि संपर्क-संवाद की कवायदों को दरकिनार नहीं करना चाहिए और पूरी उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप ही कोई दलील देते हुए किसी संघर्षविराम की घोषणा कर दें, लेकिन सायरन की तेज होती आवृत्ति और सुबह साढ़े तीन बजे तो आती रही धमाकों की आवाज से युद्ध के भीषण होने की रहीं.

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट और संघर्ष विराम के ऐलान ने जहां अपने बयान और आकलन को लेकर राहत दी तो वहीं अलर्ट से घनघनाते फोन ने संशय को बढ़ाया. ये सोचना स्वाभाविक था कि जब समझौता हो गया है तो फिर इतनी मिसाइलें कैसे चल रही हैं?

थमने लगी सायरन की आवाज

लेकिन सुबह करीब 3:30 बजे का बाद इजराइल की राजधानी तेल-अवीव में धमाकों की आवाज थम गई थी. फोन के अलर्ट बता रहे थे कि बीते कुछ घंटों के दौरान एक हजार से ज्यादा अलर्ट इजरायल के कई इलाकों के लिए दिए गए थे. मगर रात का अंधेरा छंटने और भोर की पहली किरण के साथ सीजफायर को लेकर भरोसा बढ़ने लगा.

जॉगिंग ट्रैक पर लोगों की भीड़

तेल-अवीव के हायारकॉन स्ट्रीक के जिस होटल में बीते कुछ दिनों से रुका हूं, उसके करीब समुद्र किनारे बीच पर मॉर्निंग जॉगर्स की संख्या सुबह की रौशनी के साथ-साथ धीरे-धीरे बढ़ रही थे. वैसे तो बीते कुछ दिनों में ये साफ हो चुका था कि मिसाइल के टुकड़े भले ही कई बार बीच के करीब गिर चुके हों, लेकिन तेल अवीव के वर्जिश पसंद लोगों ने बीच के जॉगिंग ट्रैक पर दौड़ लगाना नहीं छोड़ा. मगर, फिर भी यह देखने की उत्सुकता थी कि बीते कुछ दिनों के दौरान निशाने पर आए तेल-अवीव के लोग इस सीजफायर को कैसे देखते हैं.

बीच के ही करीब सुबह से खबर के अपडेट और लाइव देने के साथ-साथ मैं जॉगिंग ट्रैक पर बढ़ती संख्या को देख रहा था. ओपन जिम में वर्जिश करने वालों की संख्या के साथ ही धीरे-धीरे घूमने आने वालों की भीड़ भी बढ़ने लगी. वैसे तो छुट्टी के दिन लोगों का बाहर निकलना स्वाभाविक था, लेकिन जो बदला था वो ये कि बीते कई घंटों से कोई सायरन नहीं बजा था, ना तो सड़कें सुनसान हुईं और ना लोगों को भागकर बंकर में जाना पड़ा.

उत्सुकता बढ़ी तो मैं नजदीक के उस चौक पर पहुंचा जहां अक्सर लोग मिल जाते हैं. आम दिनों के मुकाबले भीड़ थोड़ी अधिक थी. लोग अपने छोटे बच्चों के साथ आए थे. कोई चौक में मौजूद कबूतरों को दाना खिला रहा था तो कोई अपने बच्चों के साथ चमकदार धूप में बैठकर आइसक्रीम का मजा ले रहा था. बीच पर सन-बाथ करने वालों, तैराकों और खेलने वालों की संख्या भी काफी थी.

मैंने आसपास मौजूद लोगों से बातचीत शुरू की तो नजर आया कि सुहाने मौसम वाली इस सुबह में लोगों के चेहरे पर उस सुकून की भी चमक थी जो सीजफायर के कारण बंद हुई सायरन की आवाजों से उपजी थी. चौबीस बरस की अबिगेल अपने दो बच्चों के साथ बीच की तरफ जा रही थी, बातचीत में कहा, अब राहत है कि हम सुकून से सो पाएंगे. बच्चे स्कूल जा पाएंगे. सीजफायर अभी भले ही 14 दिनों का हो, लेकिन उम्मीदहै आगे बढ़ जाएगा और यही हम सब चाहते हैं कि शांति से रह सकें.

हालांकि, नजदीक खड़े ईथन ने पहले हिब्रू में टिप्पणी की. मगर फिर अंग्रेजी में कहा कि इस सीजफायर ने मायूस किया है, क्योंकि इसने ईरान के खिलाफ उद्देश्यों को पूरा नहीं किया. बल्कि अधूरा छोड़ दिया है. लिहाजा ये केवल एक अल्पविराम है. लड़ाई फिर से छिड़ेगी, क्योंकि ईरान से आ रहा खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है.

कुछ दूर बढ़ा तो लिया और तालिया तेज कदमों से बढ़ती हुई बीच की तरफ जा रही थी. मैंने माइक बढ़ाया तो इनकार कर आगे बढ़ने लगीं. फिर मैंने कहा कि मैं भारत से हूं तो फौरन रुक गईं. मैंने पूछा आपके चेहरे पर यह मुस्कुराहट और चमक खूबसूरत मौसम की वजह से है या इस बात के कारण कि आज न सायरन बज रहे हैं और ना शेल्टर में जाना पड़ रहा है. दोनों ने खिलखिला कर हंसते हुए कहा स्वाभाविक है, ये दोनों चीजों की चमक है.

ईरान मूल के यहूदियों का नजरिया

नजदीक ही फव्वारे के करीब अपने बच्चे को खाना खिला रही एजरा ने कहा कि अभी सीजफायर पर कोई भी एक-तरफा आकलन करना जल्दबाजी होगी. ये कितना स्थायी होगा ये तो वक्त ही बताएगा. हालांकि, अपने बच्चों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इनके भविष्य के लिए जरूरी है कि पूरे क्षेत्र में शांति को और कई बार शांति युद्ध से आती है. बातों ही बातों में इजरा ने कहा कि वो फारसी मूल की हैं. यानी ईरानी मूल की यहूदी हैं, जिनके पिता 1979 के बाद पलायन कर इजराइल आए थे. वो तो कभी ईरान नहीं गईं.

हालांकि, इसी बीच एक अधेड़ उम्र की महिला आईं और कहा कि उनके भाई थोड़ी दूर बैठे हैं और बात करना चाहते हैं.

‘भारत-इजरायल अच्चे दोस्त’

मैं पहुंचा तो आइजैक इलोन बोले, आप भारत से हैं. मैं जानता हूं. इजरायल और भारत अच्छे दोस्त हैं, मगर मैं मायूस हूं कि ये युद्धविराम हो गया. इसने ईरान को फिर ताकत जुटाने का मौका दे दिए. सलिए इजरायल के लिए यह संघर्ष अभी लंबा है, लेकिन कोई बात नहीं, हम तैयार हैं. अपनी शांति के लिए हम पहले भी लड़ रहे थे और आगे भी लड़ते रहेंगे.

चौक पर धूम चढ़ने के साथ ही चहल-पहल बढ़ रही थी. आसमान में वो सोशल मीडिया के वायरल वीडियो वाले कौअवे तो नहीं, लेकिन कबूतर खूब नजर आ रहे थे. सीजफायर के बाद की इस पहली सुबह में लोग, जहां एक-दूसरे को शलोम कहते हुए युद्ध से पहले की आम रोजमर्रा जिंदगी में लौटने की उम्मीद जता रहे थे. वहीं, कुछ लोगों का मत था कि ये केवल तात्कालिक विराम है. युद्ध कुछ ही दिनों में फिर से शुरू होगा.

‘देश में चुनाव या बदलाव जरूरी’

अपने दोस्त के साथ बैठी इलाइला ने मेरे कैमरे पर बात करने में तो कोई संकोच नहीं दिखाया, लेकिन जो जवाब दिया वो काफी तल्ख था. बड़े तीखे अंदाज में इलाइला ने कहा कि युद्ध खत्म नहीं होगा, क्योंकि एक तबका है जो बस लड़ाई चाहता है. एक लड़ाई खत्म हुई नहीं कि दूसरी शुरू हो जाती है. ये सिलसिला तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक देश में चुनाव और बदलाव नहीं हो जाते. जाहिर है- इलाइला के इस बयान के कुछ देर बाद सोशल मीडिया टाइमलाइन पर नजर आई पूर्व प्रधानमंत्री याएर लापेद की पोस्ट ने इजरायल के लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के तीखे मतभेदों की बानगी भी दे दी. ईरान के खिलाफ नेतन्याहू सरकार के युद्ध के दौरान तो विपक्ष ने अपना समर्थन जताया था, लेकिन अब उतने की तीखे अंदाज में अपने मतभेद भी जताते नजर आ रहे हैं.

बहरहाल, शंकाओं और आशंकाओं के बीच इजरायल के लोगों के लिए मिमोना त्योहार की सुबह शलोम कहते हुए आई. इसने घुमक्कड़ और मस्ती पसंद इजरायलियों को घूमने-फिरने का मौका भी दे दिया और बहाना भी. सीजफायर के फैसले के लिए समर्थन हो या ना हो, लेकिन चालीस दिनों के बाद और चौदह दिनों के लिए ही सही, बिना सायरन और धमाकों की आवाज के पूरी रात नींद भर सो पाने का सुकून तो कीमती है ही.

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