‘अमेरिका को शर्मिंदगी से बचाने वाला मुखौटा है पाकिस्तान’, ईरान युद्ध में सीजफायर पर बोले शशि थरूर – Shashi Tharoor says Pakistan Acting as Diplomatic Fig Leaf in US Iran Peace Talks ntc dpmx


ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर शशि थरूर ने बड़ा सवाल उठाया है. कांग्रेस सांसद ने कहा कि पाकिस्तान असल में एक डिप्लोमैटिक ‘फिग लीफ’ यानी कूटनीतिक पर्दे की तरह काम कर रहा है, जिससे अमेरिका को असहज स्थिति से बचने में मदद मिल रही है.

थरूर ने कहा कि कई संकेत ऐसे हैं जो दिखाते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में असली फैसले कहीं और से लिए जा रहे हैं, जबकि पाकिस्तान सिर्फ एक मुखौटा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से मेल खाती थी, जिससे यह संदेह और गहरा होता है.

दरअसल, शहबाज शरीफ ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बारे में बताने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया था, जिसे उन्होंने बाद में डिलीट कर दिया. यह पोस्ट ‘Draft – Pakistan’s PM Message on X’ शीर्षक के साथ शेयर की गई थी. शहबाज शरीफ ने भले ही पोस्ट हटा दिया, लेकिन उन्होंने जो दूसरी पोस्ट की उसके शब्दों में कोई बदलाव नहीं किया. इससे ये अटकलें तेज हो गईं कि यह मैसेज शरीफ को अमेरिका की ओर से लिखकर दिया गया था.

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अमेरिका में तीन दशक तक काम कर चुके शशि थरूर ने यह भी माना कि मौजूदा हालात में पाकिस्तान के पास कुछ कूटनीतिक फायदे हैं. उनके मुताबिक, पाकिस्तान ऐसी भूमिका निभा सकता है जिसमें अमेरिका और ईरान तनाव कम कर सकें और उन्हें ऐसा भी न लगे कि वे एक दूसरे के सामने झुक रहे हैं. भारत की भूमिका पर बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि नई दिल्ली को भी आगे आना चाहिए, भले ही मध्यस्थता पाकिस्तान के जरिए हो रही हो.

उन्होंने कहा कि भारत की क्षेत्रीय जिम्मेदारी है और उसे व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि यह युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल रहा है, इसलिए भारत सिर्फ प्रभावित देश ही नहीं, बल्कि ग्लोबल ऑर्डर का एक अहम स्टेकहोल्डर भी है. उन्होंने कहा कि भारत को युद्ध के बाद बनने वाले नए ग्लोबल ऑर्डर को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक शांति के लिए इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय वार्ता शुक्रवार से शुरू होने वाली है.

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