अलवर की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. एक सामान्य टैक्सी का सफर, ड्राइवर से कुछ बातचीत, फिर बढ़ती नजदीकियां. इस बाद पूरा मामला दोनों की गिरफ्तारी तक पहुंच जाता है. कहानी की शुरुआत होती है अर्चना अरोड़ा से, जो एक बैंक मैनेजर कर्णव खत्री की पत्नी है. पति जयपुर में नौकरी करता था, इसलिए अर्चना का वहां आना-जाना लगा रहता था. सफर के लिए टैक्सी लेना रोजमर्रा की बात थी लेकिन एक दिन यही सफर उसकी जिंदगी का मोड़ बन गया.
सफर के दौरान उसकी मुलाकात हुई टैक्सी ड्राइवर ऋषभ शर्मा से. शुरुआत में कितनी दूरी है, कितना समय लगेगा जैसी बात होती थी, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत का दायरा बढ़ता गया. फोन नंबर शेयर हुए, फिर कॉल्स शुरू हुईं और देखते ही देखते यह रिश्ता एक अलग दिशा में बढ़ गया. अब हालात ये थे कि दोनों के बीच बातचीत सिर्फ कभी-कभार नहीं, बल्कि रोज की आदत बन चुकी थी. घंटों फोन पर बात होती और धीरे-धीरे यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि दोनों ने एक-दूसरे के बिना सोचना भी मुश्किल कर दिया.
एक दिन कर्णव खत्री (अर्चना के पति) जयपुर से अलवर लौट रहे थे. संयोग से टैक्सी वही थी और ड्राइवर भी वही ऋषभ था. कर्णव पीछे की सीट पर बैठे और कुछ देर बाद सो गए. ऋषभ को लगा कि वह गहरी नींद में हैं. उसने तुरंत फोन मिलाया अर्चना को. फोन पर बातचीत शुरू हुई और जो बातें हुईं, उन्होंने इस कहानी को पूरी तरह बदल दिया. ऋषभ ने कहा कि तुम्हारा पति मेरे साथ ही गाड़ी में है… अगर कहो तो आज ही इसे रास्ते से हटा दूं. पीछे की सीट पर लेटे कर्णव की आंखें खुल चुकी थीं.उन्होंने बिना कुछ बोले पूरी बातचीत अपने फोन में रिकॉर्ड कर ली.
शक से यकीन तक का सफर
इस एक रिकॉर्डिंग ने कर्णव के शक को यकीन में बदल दिया. उन्होंने चुपचाप और सबूत जुटाने शुरू किए. कॉल डिटेल, बातचीत, फोन रिकॉर्डिंग सब कुछ धीरे-धीरे सामने आने लगा. अब साफ हो चुका था कि यह सिर्फ जान-पहचान नहीं, बल्कि गहरा रिश्ता है. जब कर्णव ने अर्चना से इस बारे में बात की, तो मामला संभलने के बजाय और बिगड़ गया. बातचीत बहस में बदली और बहस विवाद में. रिश्ता अब उस मोड़ पर पहुंच चुका था, जहां से लौटना आसान नहीं था. कुछ समय बाद मामला तलाक तक पहुंच गया. इसी बीच अर्चना की तरफ से 50 लाख रुपये की मांग की बात सामने आई. कर्णव ने इनकार किया, तो दोनों के बीच तनाव और बढ़ गया.
सब कुछ छोड़कर चली गई
एक दिन अचानक अर्चना घर छोड़कर चली गई. पुलिस के मुताबिक, वह अपने साथ नकदी और जेवरात भी ले गई और बाद में अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई. घर, परिवार, बच्चे सब पीछे छूट गया. मार्च 2026 में कर्णव ने आखिरकार पुलिस का दरवाजा खटखटाया. शिकायत दर्ज हुई, जांच शुरू हुई, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला. करीब एक महीने बाद अचानक अर्चना और ऋषभ खुद ही अलवर के एसपी ऑफिस पहुंच गए. जैसे ही पुलिस को जानकारी मिली, दोनों को वहीं से गिरफ्तार कर लिया गया. अदालत में पेशी हुई महिला को जेल भेजा गया और आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू हुई. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में कई पहलुओं की जांच की जा रही है. रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
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