पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान को लेकर शांति वार्ता के शुरू होने का इंतजार है, इधर इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है. दक्षिणी लेबनान के अल शहाबिया में इजरायली हमले के बाद व्यापक नकुसान की तस्वीरें सामने आई हैं, कई घर ढह गए हैं, सड़कों पर मलबा दिख रहा है. और पूरा इलाका सुनसान दिख रहा है.
पिछले 48 घंटों में इजरायल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा ठिकानों पर 160 से अधिक मिसाइलें दागी गईं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार इन हमलों में कम से कम 250 से 300 लोग मारे गए और 1000 लोग जख्मी हुए हैं.
इजरायल का हमला मुख्य रूप से बेरूत, सेंट्रल और तटीय इलाके, कॉर्निश के पास हुए. इसके अलावा दक्षिणी लेबनान के टायर, सिडोन, नबातिएह और पूर्वी बेका घाटी में हुए.
इजरायल का दावा है कि हिजबुल्लाह के 100 कमांड सेंटर्स और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन कई नागरिक इलाकों और आवासीय भवनों में भी हमले हुए.
आज इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव तब बढ़ गया, जब लेबनान ने इज़रायल पर देश के दक्षिणी कस्बों पर हवाई हमले करके संघर्ष-विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में हिज़्बुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई की.
एक बयान में ईरान-समर्थित लेबनानी उग्रवादी समूह ने कहा कि उसने सुबह लगभग 8 बजे इजरायली बस्ती मिसगाव अम को निशाना बनाते हुए एक रॉकेट हमला किया. हिज़्बुल्लाह ने कुल मिलाकर 6 रॉकेट लेबनान पर दागे हैं.
हिज्बुल्लाह ने इस हमले को “लेबनान और उसके लोगों की रक्षा में” किया गया बताया.
हिज्बुल्लाह ने आगे दावा किया कि यह उसी टारगेट पर उसका दूसरा हमला था, और चेतावनी दी कि जब तक लेबनान के खिलाफ इज़रायल की कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक वह भी अपनी कार्रवाई जारी रखेगा.
इन दावों पर इज़रायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई.
इस बीच लेबनान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि किसी भी आगे की बातचीत के लिए युद्धविराम एक पूर्व शर्त बनी हुई है, जो बढ़ते तनाव के बीच बेरूत के कड़े रुख का संकेत है.
रॉयटर्स से बात करते हुए अधिकारी ने आगे कहा कि लेबनान अगले सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली एक बैठक में हिस्सा लेने का इरादा रखता है, जहां चर्चा का मुख्य केंद्र युद्धविराम को अंतिम रूप देना और उसकी औपचारिक घोषणा करना होने की उम्मीद है.
तनाव में यह ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से होने वाली अहम बातचीत से पहले बयानबाजियों का दौर चल रहा है.
ठीक एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेबनान पर हमलों को कम करने का आग्रह किया था. इसके बाद इजरायल के हमले कुछ घंटे तक तो कम हुए लेकिन शुक्रवार को इन हमलों में तेज इजाफा हुआ.
हालांकि इजरायल के पीएम अभी भी यह कह रहे हैं कि हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने पर ही लेबनान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में काम हो पाएगा.
एक बड़ी अड़चन अभी भी यह बनी हुई है कि क्या लेबनान इस संघर्ष-विराम के दायरे में आता है. जहां एक ओर ट्रंप और नेतन्याहू का मानना है कि यह इसके दायरे में नहीं आता, वहीं दूसरी ओर ईरान का जोर देकर कहना है कि यह इसके दायरे में आता है.
इजरायल लेबनान की पुरानी अदावत
1948 में इज़राइल की स्थापना के बाद से ही इजरायल और लेबनान तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं. लेबनान के साथ बातचीत की इजरायल की घोषणा ऐसे समय में आई है, जब इस बात पर असहमति बनी हुई है कि क्या युद्धविराम समझौते में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई में विराम शामिल था या नहीं.
एक व्यक्ति के अनुसार वाशिंगटन में होने वाली इन वार्ताओं में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा करेंगे, जबकि इज़रायली पक्ष का नेतृत्व अमेरिका में इज़रायली राजदूत येचिएल लाइटर करेंगे.
शुक्रवार सुबह तक लेबनान सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी और यह भी तत्काल स्पष्ट नहीं था कि लेबनान का प्रतिनिधित्व कौन करेगा.
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