15 साल में जितना फोन स्मार्ट हुआ, इंसान 50,000 साल में नहीं हुआ! फोर्ब्स रिपोर्ट ने दी करियर बचाने की चेतावनी – career technical skills ai impact human expertise job market edmm


आज के दौर में करियर बनाना किसी भागती हुई ट्रेन को पकड़ने जैसा हो गया है. तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि जो आपने कॉलेज में सीखा, वह ऑफिस पहुंचते-पहुंचते पुराना हो जाता है. दिग्गज बिजनेस पत्रिका फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया गया है, आज के दौर में किसी भी ‘टेक्निकल स्किल’ की उम्र (हाफ टाइम) औसतन सिर्फ 5 साल रह गई है. यानी 5 साल बाद आपका आज का हुनर ‘आउटडेटेड’ हो सकता है.

क्यों लग रहा है कि हम ‘रेत पर दौड़’ रहे हैं?
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के कारण जॉब टाइटल और काम के तरीके इतनी तेजी से बदल रहे हैं कि कंपनियां भी अपने ‘जॉब डिस्क्रिप्शन’ अपडेट नहीं कर पा रही हैं. Prosper Insights & Analytics के एक सर्वे (8,000 लोगों पर आधारित) में पाया गया कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता इतनी बढ़ गई है कि 50% कर्मचारी और बिजनेस मालिक अब ‘YOLO’ (लिव फॉर टुडे) की फिलॉसफी पर जीने लगे हैं. उन्हें लगता है कि कल का करियर इतना धुंधला है कि आज में जीना ही बेहतर है.

स्मार्टफोन बदल गया, पर इंसान का दिमाग नहीं!
रिपोर्ट में एक बहुत बड़ी बात कही गई है, पिछले 15 साल में स्मार्टफोन जितना बदल गया है, उतना इंसान का दिमाग पिछले 50,000 साल में नहीं बदला. एआई के इस शोर में हम अक्सर भूल जाते हैं कि हमारे दिमाग के काम करने का तरीका (जैसे रिश्ते बनाना, टीम में काम करना, भरोसा जीतना) आज भी वही है जो सदियों पहले था.

वो चीजें जो एआई (AI) कभी नहीं बदल पाएगा
इंसानी फितरत है ‘गुटों’ या ‘कबीलों’ में काम करना. चाहे स्टार्टअप हो या बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी, टीम के भीतर लोगों का आपस में जुड़ाव और एक-दूसरे की भूमिका का सम्मान कभी नहीं बदलेगा.

सर्वे में पाया गया कि जब बात बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत या इलाज जैसे गंभीर मुद्दों की आती है, तो आज भी लोग एआई के बजाय इंसानी एक्सपर्ट पर ही भरोसा करते हैं. यानी ‘ह्यूमन टच’ और ‘एक्सपर्ट एडवाइस’ की वैल्यू कभी खत्म नहीं होगी.

करियर बचाने का ‘गोल्डन रूल’
न्यूरोसाइंटिस्ट और जॉब मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि उन स्किल्स के पीछे भागने के बजाय जो अगले साल पुराने हो जाएंगे, उन क्षमताओं पर निवेश करें जो कभी नहीं मरतीं. इन्हें ‘लिबरल आर्ट्स’ या ‘सॉफ्ट स्किल्स’ कहा जाता है, जैसे सही फैसला लेना, टीम को लीड करना और दूसरों की भावनाओं को समझना.

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