मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल ने ईरान को लेकर एक चौंकाने वाला आकलन पेश किया है. करीब 40 दिन तक चले युद्ध के बाद IDF ने इजरायली संसद ‘नेसेट’ को बताया है कि ईरान में जो नया शासन उभरा है, वह पहले की तुलना में कहीं  ज्यादा कट्टर विचारधारा वाला है. माना जा रहा था कि अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके करीबी नेताओं को हटाने के बाद हालात बेहतर होंगे, लेकिन अब मामला उल्टा पड़ता दिख रहा है.

‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, IDF के प्रतिनिधियों ने नेसेट की विदेश मामलों और रक्षा समिति को एक बंद कमरे में दी गई खुफिया ब्रीफिंग में इस नए शासन के बारे में जानकारी दी. सूत्रों का कहना है कि वर्तमान शासन के नेता ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े हैं, जिन्हें पिछले राजनीतिक नेतृत्व की तुलना में कहीं अधिक कट्टर विचारधारा वाला माना जाता है.

अगर यह आकलन सही है तो इजरायल और अमेरिका के लिए यह बड़ी चुनौती बन सकता है. क्योंकि जिस खतरे को खत्म करने के लिए सैन्य अभियान चलाया गया, अब वही खतरा और बड़ा रूप लेता दिख रहा है. पिछले 40 दिनों से जारी इस जंग ने ईंधन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की भारी कमी पैदा कर दी है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने इस पूरे अभियान के दौरान ईरान के अंदर 1,000 से ज्यादा हवाई हमले किए और कुल 8,500 से ज्यादा ऑपरेशनल मिशन पूरे किए. करीब 4,000 ठिकानों को निशाना बनाया गया. वहीं अमेरिका को भी इस 40 दिन की जंग में भारी नुकसान उठाना पड़ा है. उसके कई सैन्य संसाधन नष्ट हुए और दो सैनिकों को ईरान के भीतर से जोखिम भरे ऑपरेशन में बचाना पड़ा.

सबसे अहम बात यह है कि यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब दुनिया को राहत देने के लिए शांति वार्ता की उम्मीदें बढ़ रही थीं. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शनिवार से पाकिस्तान में शुरू होने वाली है. इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे.

ईरान की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय मीडिया के अनुसार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष गला मोहम्मद बागेर गालिबाफ कर सकते हैं. लेबनान ने भी संकेत दिया है कि वह अगले हफ्ते वॉशिंगटन में अमेरिका और इज़रायल के साथ बैठक में शामिल होगा, जहां संघर्षविराम पर चर्चा हो सकती है.

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