31 मई तक सख्ती… दुबई ने विदेशी उड़ानों पर लगाई सीमा, इंडियन एयरलाइंस पर पड़ी सबसे ज्यादा मार – dubai flight restrictions indian airlines impact iran crisis aviation news india uae flights NTC AGKP

ByCrank10

April 10, 2026


अमेरिका-ईरान से जुड़े युद्ध के चलते दुबई ने एक बड़ा फैसला किया है. दुबई ने विदेशी एयरलाइंस को 31 मई तक रोजाना सिर्फ एक उड़ान की इजाजत दी है. इस फैसले की सबसे ज्यादा मार भारतीय एयरलाइंस पर पड़ी है क्योंकि दुबई जाने की सबसे ज्यादा उड़ानें भारत से ही थीं.

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी DXB आम दिनों में दुनिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा होता है. भारत से दुबई जाने वाले यात्रियों की तादाद सबसे ज्यादा है. साल 2025 में करीब 1 करोड़ 19 लाख भारतीय यात्री दुबई के रास्ते से गुजरे थे. यानी दुबई एयरपोर्ट के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है.

नया नियम क्या है?

27 मार्च को दुबई एयरपोर्ट ने एयरलाइंस को एक प्राइवेट ईमेल भेजा. इसमें कहा गया कि ईरान संकट की वजह से 20 अप्रैल से 31 मई तक हर विदेशी एयरलाइन सिर्फ एक उड़ान रोजाना दुबई आ-जा सकती है. इसे ‘वन रोटेशन पर डे’ कहा गया यानी एक बार आओ और एक बार जाओ, बस.

भारतीय एयरलाइंस पर क्या असर पड़ा?

इस नियम से भारतीय एयरलाइंस को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ क्योंकि उन्होंने अप्रैल-मई में दुबई के लिए सबसे ज्यादा उड़ानें बुक की थीं. आंकड़ों पर नजर डालें तो एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इस दौरान 750 से ज्यादा उड़ानें तय की थीं. इंडिगो ने 481 उड़ानें प्लान की थीं और इंडिगो का कहना था कि उसकी गर्मियों की मंजूरशुदा उड़ानें दिल्ली-दुबई के बीच रोज 15 थीं. स्पाइसजेट ने 61 उड़ानें रखी थीं. लेकिन अब सभी को महीने में सिर्फ 30 या 31 उड़ानें ही मिलेंगी.

सबसे बड़ी नाराजगी क्यों है?

भारतीय एयरलाइंस इसलिए सबसे ज्यादा नाराज हैं क्योंकि यह नियम सिर्फ विदेशी एयरलाइंस पर लगाया गया है. दुबई की अपनी एयरलाइंस जैसे एमिरेट्स और फ्लाईदुबई पर यह पाबंदी नहीं है. वो पहले की तरह सैकड़ों उड़ानें रोज भर रही हैं. यानी दुबई की एयरलाइंस तो पूरी क्षमता से उड़ रही हैं और भारतीय एयरलाइंस को महीने में सिर्फ 30-31 उड़ानों तक सीमित कर दिया गया है. इंडिगो ने कहा कि इस वजह से उसके बहुत सारे जहाज खाली खड़े हैं और नुकसान हो रहा है.

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फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने क्या किया?

इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस के संगठन FIA यानी फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने 31 मार्च को भारत सरकार को एक चिट्ठी लिखी. इसमें दो मांगें रखी गईं. पहली यह कि भारत सरकार दुबई से बात करके इस पाबंदी को हटवाए. दूसरी यह कि अगर यह पाबंदी नहीं हटती तो भारत भी एमिरेट्स और फ्लाईदुबई जैसी दुबई की एयरलाइंस पर भारत में वही पाबंदी लगाए.

भारतीय एयरलाइंस पर पहले से भी था दबाव?

यह मुसीबत तब आई जब भारतीय एयरलाइंस पहले से ही परेशान थीं. पाकिस्तान से तनाव के चलते पिछले साल से भारतीय एयरलाइंस पाकिस्तान के हवाई रास्ते का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं. इससे यूरोप और पश्चिम की तरफ जाने वाली उड़ानें लंबी हो गई हैं जिससे ईंधन का खर्च बढ़ गया है. ऊपर से तेल के बढ़े हुए दाम. और अब दुबई की यह पाबंदी.

बाकी देशों की एयरलाइंस का क्या?

लुफ्थांसा, सिंगापुर एयरलाइंस और ब्रिटिश एयरवेज जैसी बड़ी एयरलाइंस ने भी दुबई की अपनी उड़ानें 31 मई तक रद्द कर दी हैं. लेकिन उनकी दुबई में पहले भी उतनी उड़ानें नहीं थीं जितनी भारतीय एयरलाइंस की थीं. इसलिए उन्हें उतना नुकसान नहीं हुआ. ये एयरलाइंस अब एशिया और यूरोप के बीच सीधी उड़ानें बढ़ा रही हैं जहां यात्रियों की मांग और किराया दोनों बढ़े हैं.

इनपुट: रॉयटर्स

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