‘वो बोल न सकी पर सच चुप न रहा…’, महिला जज ने फैसले में कविता लिखकर बयां किया मूक-बधिर पीड़िता का दर्द, दरिंदे को सुनाई उम्रकैद – tonk court justice aarti maheshwari rape accused life imprisonment emotional poem lcln


राजस्थान के टोंक जिले की एससी-एसटी कोर्ट की विशिष्ट न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है. न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने यह सजा अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में पेश किए गए 16 गवाहों, 33 दस्तावेजों और 5 आर्टिकल के आधार पर सुनाई है.

दुष्कर्मी रामलाल डिग्गी थाना क्षेत्र के भवानीपुरा का रहने वाला है, जिसे अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे ही गुजारनी पड़ेगी. रामलाल पर दो अलग-अलग धाराओं में 1 लाख 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. साथ ही पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत राशि दिए जाने के आदेश भी दिए गए हैं.

यह था शर्मसार करने वाला मामला
रामलाल नामक 55 वर्षीय अधेड़ ने झिराना थाना क्षेत्र के एक गांव में 20 वर्षीय युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया था. वह युवती न सिर्फ मानसिक रूप से विमंदित और चलने-फिरने में असमर्थ थी, बल्कि मूक-बधिर भी थी.

रामलाल ने युवती को अकेला पाकर यह शर्मनाक घटना को अंजाम दिया. तभी पीड़िता की बहन और मां घर आ गईं. उनके शोर मचाने पर आसपास के लोग भी वहां पहुंच गए और दुष्कर्मी रामलाल को वहीं पकड़ लिया गया. उसकी पहचान उसके पास मिले आधार कार्ड और पैन कार्ड से हुई. बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़िता के मकान से कुछ दूरी पर रामलाल को बरामद किया था.

गौरतलब है कि दुष्कर्मी रामलाल ईंट भट्ठों पर कमीशन एजेंट था और पीड़िता के मकान के निर्माण का काम चल रहा था. वारदात के दिन परिवार के सदस्य बाहर गए हुए थे और उसने इन्हीं हालातों का फायदा उठाकर घटना को अंजाम दिया था.

टोंक एससी-एसटी कोर्ट ने 55 वर्षीय दरिंदे को सुनाई उम्रकैद.

पीड़िता को गवाही के लिए व्हीलचेयर पर लाया गया था-पीड़िता की शारीरिक अक्षमता को देखते हुए मामले की सुनवाई के दौरान माता-पिता द्वारा उसे व्हीलचेयर पर ही कोर्ट में लाया गया था. पीड़िता की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने वाली उसकी मां ने न्यायाधीश के समक्ष अपनी गवाही दर्ज कराई थी.

फैसले के साथ अंकित की गई मार्मिक कविता
न्यायाधीश आरती माहेश्वरी ने केवल कानूनी फैसला ही नहीं सुनाया, बल्कि पीड़िता के दर्द को समझते हुए फैसले के अंत में एक 12 लाइनों की मार्मिक कविता भी पढ़ी:

“वो बोल ना सकी पर सच चुप न रहा,
खामोशी ने भी अपराधी को पहचाना
नजरों की भाषा में सच उजागर हुआ,
हर संकेत ने अपराध को बेनकाब किया
आई फिर एक रोशनी, बहिन बनी आधार;
थामा उसका हाथ जब, टूटा सारा अंधकार
मौन सही पर हार नहीं, रूह रही मजबूत;
हर अन्याय के सामने, सच रहता है अटूट
न्याय की राह जगानी है, हर आवाज सुनवानी है;
अब वक्त है आवाज उठाने का, हर खामोश को न्याय दिलाने का.”

—- समाप्त —-



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