मध्य प्रदेश में 14 महीनों के भीतर 149 तेंदुओं की मौत, RTI में चौंकाने वाला खुलासा; वन विभाग ने बताई ये वजह – 149 leopards died in MP in 14 months accidents major cause lcln


मध्य प्रदेश में तेंदुओं की मौत को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से 14 महीनों में राज्य में 149 तेंदुओं की मौत दर्ज की गई है. डेटा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 31% मौतें सड़क हादसों में हुईं. इनमें से 19 तेंदुओं की जान हाईवे पर गई.
हालांकि, RTI अर्जी दाखिल करने वाले एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई दिखाते हैं, वहीं वन विभाग ने कहा कि मौतों को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं. विभाग ने यह भी कहा कि चार प्रतिशत की मृत्यु दर तेंदुए के लिए स्वीकार्य सीमा के भीतर ही है.

फरवरी 2024 में जारी भारत में तेंदुओं की स्थिति 2022 रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में देश में तेंदुओं की आबादी सबसे ज्यादा है, जो 3907 है. इसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का नंबर आता है. राज्य में 2018 में 3421 तेंदुओं की गिनती की गई थी.

RTI जवाब में विभाग ने बताया कि जनवरी 2025 से शुरू हुए 14 महीनों में मध्य प्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हुई. इनमें से 31 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं. डेटा से पता चला कि 19 मौतें हाईवे पर हुईं.

क्यों और कैसे मरे तेंदुए?

24% मौतें बुढ़ापे और बीमारी से
21% मौतें आपसी संघर्ष में
14% मौतें शिकार या बदले की घटनाओं में
8 तेंदुओं की मौत बिजली करंट से
2 तेंदुए फंदों में फंसे
करीब 9% मामलों में कारण अज्ञात

वन विभाग बनाम RTI एक्टिविस्ट

वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि राज्य में तेंदुओं की मृत्यु दर को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

कृष्णमूर्ति ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, “हम एक तय रोडमैप के साथ मृत्यु दर को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. हम इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि तेंदुए आकार में छोटे होते हैं और आसानी से नजर नहीं आते, इसलिए वे पूरे राज्य में फैले हुए हैं.” उन्होंने कहा कि ये चितकबरे जानवर अक्सर बड़े इलाकों में इंसानी बस्तियों के काफी करीब पाए जाते हैं.

वन विभाग का बचाव

वन अधिकारी ने बताया कि मौतों को कम करने के लिए नई सड़कों पर जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ते चेतावनी के संकेत और नियमित गश्त जैसे उपाय लागू किए जा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, “हम सड़कों के पास पानी के स्रोत न बनाने की भी सलाह दे रहे हैं, क्योंकि जानवर अक्सर पानी की तलाश में सड़कों की ओर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार बन जाते हैं.”

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि 4000 तेंदुओं में से 149 की मौत (4%) मंजूर करने लायक है. उनके अनुसार, ‘कैट फैमिली’ में सालाना 10 से 20 प्रतिशत तक का नुकसान सामान्य माना जाता है.

एक्टिविस्ट दुबे ने कहा कि मध्य प्रदेश में तेंदुओं की रिकॉर्ड-तोड़ मौतें एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती हैं. उन्होंने कहा, “टाइगर स्टेट (MP) तेंदुओं के लिए एक कब्रिस्तान बन गया है. NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के प्रोटोकॉल को लागू करने में सिस्टम की नाकामी और सुरक्षित रास्तों की कमी उन्हें खत्म कर रही है.”

उन्होंने कहा कि हालांकि सबसे ज्यादा मौतें हादसों की वजह से होती हैं, फिर भी लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर या बिजली के झटके से जुड़ी मौतों के लिए किसी की कोई जवाबदेही नहीं है. उन्होंने दावा किया, “NTCA और वन विभाग की लापरवाही यह साबित करती है कि तेंदुए उनके लिए दूसरी प्राथमिकता हैं.”

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