टेक्नोलॉजी, जहां फायदे के लिए तैयार की जाती है, वहीं इसके कुछ नुकसान भी होते है. जहां लैंडलाइन फोन के समय लोगों को अपने रिश्तेदारों और ऑफिस आदि के कॉन्टैक्ट नंबर याद रहते थे. स्मार्टफोन आने के बाद फोन नंबर याद रखने की आदत बहुत कम हो गई. अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) आ चुका है, जो आने वाले 2-3 साल में हमारी कई आदतों को बदल देगा.
लिखने से लेकर इमेज बनाने तक में AI मदद कर रहा है. हाल ही में सामने आईं खबरों से पता चलता है कि बहुत से लोग AI चैटबॉट से दोस्ती करते हैं और कई घंटों तक बातचीत करते हैं. यहां तक कि लोग ट्रैवल प्लानिंग के लिए AI का सहारा ले रहे हैं.
कई रिसर्च में बताया है कि AI का ज्यादा यूज करने की वजह से इंसानों पर काफी नकारात्मक असर भी पड़ेंगे. कोलम्बिया यूनिवर्सिटी, CSIRO, एमडीपीआई, और रिसर्चगेट आदि पर कई रिसर्च पेपर इंटरनेट पर मौजूद हैं, जो इंसानों पर पड़ने वाले AI के नेगेटिव इफेक्ट को बताते हैं.
सोचना की क्षमता प्रभावित होगी
AI चैटबॉट के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से इंसानों की सोचना की काबिलियत प्रभावित होगी. साल 2025 में हुई एक स्टडी के मुताबिक, जब लोग AI पर ज्यादा निर्भर होंगे तो उनके सोचने की काबिलियत कम होने लगेगी. इसे कॉग्नेटिव ऑफ लोडिंग नाम दिया है.
खुद नहीं ले सकेंगे फैसले
AI चैटबॉट पर ज्यादा निर्भर होने की वजह से इंसानों में फैसला लेने की काबिलियत कम हो जाएगी. बीएसएसएसपब्लिकेशन पर एक सर्वे लिस्ट है, जहां बताया गया है कि AI का ज्यादा यूज इंसानों के थिंकिंग प्रोसेस को स्लो कर देगा. इसकी वजह से इंसान गलत फैसले की तरफ भी जा सकते हैं.
AI की वजह से व्यवहार बदलेगा
रिसर्चगेट पर पब्लिश एक स्टडी में बताया गया है कि AI का यूज करने की वजह से इंसानों की आदत, पसंद और सोचने का तरीका बदल जाएगा. इससे इंसानों का व्यवहार काफी बदल जाएगा.
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टाइप करने की जगह बोलकर टाइप करना
AI चैटबॉट का ज्यादा यूज करने की वजह इंसान और ज्यादा आलसी होंगे. आने वाले सालों में बहुत सारे लोग टाइपिंग करने की जगह बोलकर टाइप करना शुरू करेंगे, जिसकी वजह से ज्यादा गलतियां होगी. ऐसी गलतियां आपकी छवि को बिगाड़ सकती हैं.
AI को लोग ट्यूटर मान लेंगे
रिसर्च में बताया है कि AI को लोग ट्यूटर की तरह यूज करेंगे. इसमें वे पढ़ाई से लेकर रिलेशन तक की सलाह मांगेंगे. हालांकि AI कंपनियों के सीईओ तक मना कर चुके हैं कि AI को कतई भी डॉक्टर ना समझें.
नई भाषा नहीं सीखेंगे
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के यूज के चलते ट्रांसलेशन का काम आसान हुआ है. फिर चाहें ऑडियो ट्रांसलेट करनी हो या फिर टेक्स्ट को ट्रांसलेट करना हो. ऐसे में लोग नई भाषाओं को सीखने की जगह AI पर निर्भर हो जाएंगे.
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