अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आज इस्‍लामाबाद में होने जा रही है. दोनों देशों के बीच नाजुक स्थिति बनी हुई है. इस बीच, विदेशी अरबपति निवेशक रे डेलियो ने एक कड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि विश्‍व की व्‍यवस्‍था दाव पर है और अब संघर्ष का आखिरी परिणाम स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर करेगा.

सोशल मीडिया पर एक पोस्‍ट में उन्‍होंने तर्क दिया कि दोनों पक्षों ने जीत का दावा किया है और बातचीत में शामिल होने के बावजूद, असली ‘आखिरी लड़ाई’ अभी बाकी है. उन्‍होंने लिखा कि यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि होर्मुज पर किसका कंट्रोल है. उन्‍होंने होर्मुज को एक नया निर्णायक फैक्‍टर बताते हुए कहा कि यह ग्‍लोबल पॉवर बैलेंस, फाइनेंस मार्केट और मौजूदा वर्ल्‍ड ऑर्डर को नया आकार दे सकता है.

डेलियो ने ट्रंप पर सीधा फोकस करते हुए तर्क दिया कि होर्मुज के माध्‍यम से बिना रुकावट आवागमन तय करने की क्षमता ही यह तय करेगी कि अमेरिका को ग्‍लोबल लीडर के तौर पर देखा जाएगा या एक पतन होने वाली शक्ति के तौर पर देखा जाएगा.

होर्मुज पर कंट्रोल नहीं करना होगी
उन्‍होंने कहा कि अगर अमेरिका होर्मुज पर कंट्रोल नहीं हासिल कर पाता है तो उसे हारा हुआ माना जाएगा और इसके परिणाम अतीत में हुए साम्राज्यवादी पतन के समान हो सकते हैं, जहां कुछ प्रमुख शक्तियों ने महत्‍वपूर्ण व्‍यापार मार्गों पर अपना कंट्रोल खो दिया था. डेलियो ने आगे कहा कि सहयोगी नेवी के सपोर्ट के साथ होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए अमेरिका के लीडरशिप में किया गया निर्णायक प्रयास अमेरिकी शक्ति में विश्‍वास को मजबूत कर सकता है, बाजारों को स्थिर कर सकता है और ग्‍लोबल लीडर की पुष्टि कर सकता है.

लंबा खींच सकता है युद्ध
डेलियो ने कहा कि यह एक धैर्य की लड़ाई है और ईरान की रणनीति संघर्ष को लंबा खींचने पर आधारित हो सकती है, और वह लंबे, खर्चीले युद्धों के प्रति अमेरिकी जनता की सीमित सहनशीलता पर दांव लगा रहा है, जो वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में हुए पिछले संघर्षों की याद दिलाता है. उन्होंने लिखा कि युद्ध में, दर्द सहने की क्षमता, दर्द पहुंचाने की क्षमता से भी अधिक महत्वपूर्ण होती है और चेतावनी दी कि एक लंबा संघर्ष अमेरिकी संकल्प को कमजोर कर सकता है और गठबंधनों पर दबाव डाल सकता है.

अंतिम जंग अभी बाकी
बातचीत जारी रहने के बावजूद, डेलियो ने किसी स्थायी समझौते की संभावना को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कोई भी समझौता इस युद्ध का समाधान नहीं करेगा और भविष्यवाणी की कि संघर्ष का सबसे भीषण समय ‘अंतिम युद्ध’ अभी आना बाकी है. उन्होंने चेतावनी दी कि तेल सप्‍लाई और ग्‍लोबल आपूर्ति के लिए खतरों समेत तनाव बढ़ने का जोखिम अभी भी अधिक है. खासकर अगर होर्मुज के आसपास सैन्य टकराव तेज होता है.

उन्‍होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका होर्मुज को सुरक्षित कर लेता है, तो वह दशकों से चली आ रही भू-राजनीतिक नेतृत्व की स्थिति को और मजबूत कर सकता है. लेकिन चेतावनी दिया कि अगर वह इसमें विफल रहता है, तो इससे शक्ति संतुलन में बदलाव की गति तेज हो सकती है.

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