अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत चल रही है. लेकिन उसी दौरान ट्रंप सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया. अमेरिका ने ईरान के मौजूदा और पूर्व बड़े अधिकारियों के रिश्तेदारों के ग्रीन कार्ड यानी अमेरिका में रहने का स्थायी परमिट रद्द कर दिए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
ग्रीन कार्ड अमेरिका सरकार की तरफ से दिया जाने वाला एक खास दस्तावेज है जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में हमेशा के लिए कानूनी तौर पर रहने और काम करने की इजाजत देता है. जिनके पास यह कार्ड होता है उन्हें ‘लॉफुल परमानेंट रेसिडेंट’ कहते हैं. यह अमेरिकी नागरिकता नहीं होती लेकिन उसके बहुत करीब होती है.
इस बार किनके ग्रीन कार्ड रद्द हुए?
इस बार अमेरिका के विदेश विभाग ने तीन लोगों के ग्रीन कार्ड रद्द किए. ये तीनों ईरान में पैदा हुए थे और लंबे समय से अमेरिका में कानूनी तौर पर रह रहे थे. इनमें से एक हैं सैयद ईसा हाशमी जो लॉस एंजेलिस के पास एक स्कूल में मनोविज्ञान यानी साइकोलॉजी के टीचर हैं. उनके साथ उनकी पत्नी और बेटे के ग्रीन कार्ड भी रद्द कर दिए गए.
इन पर कार्रवाई क्यों हुई?
सैयद ईसा हाशमी की मां का नाम मासूमेह एब्तेकार है. यह वही महिला हैं जिन्होंने 1979 में अमेरिकी दूतावास पर हमले के दौरान हमलावरों की तरफ से बोलने वाली की भूमिका निभाई थी. बाद में वो ईरान की पहली महिला उपराष्ट्रपति भी बनीं. यानी अमेरिका ने हाशमी को उनकी मां के पुराने काम की वजह से निशाना बनाया.
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पिछले हफ्ते भी ऐसा हुआ था?
यह पहली बार नहीं हुआ. पिछले हफ्ते भी अमेरिका ने इसी तरह की कार्रवाई की थी. उस बार ईरान के मशहूर जनरल कासिम सुलेमानी की भतीजी और उनकी बेटी के ग्रीन कार्ड रद्द किए गए थे. सुलेमानी को जनवरी 2020 में बगदाद में अमेरिकी हमले में मार दिया गया था.
यह कदम अभी क्यों उठाया गया?
जिस वक्त इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो रही थी, ठीक उसी वक्त यह खबर जारी की गई. इससे यह संदेश साफ है कि ट्रंप सरकार बातचीत के साथ-साथ दबाव भी बनाए रख रही है. यह ईरान को यह बताने का तरीका है कि अमेरिका कमजोर नहीं पड़ा है.
इन लोगों का अब क्या होगा?
जिन तीनों लोगों के ग्रीन कार्ड रद्द किए गए हैं उन्हें इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है. उन्हें जल्द ही अमेरिका से निकाला जाएगा यानी वापस ईरान भेजा जाएगा. यह उन लोगों के लिए बड़ा झटका है जो सालों से अमेरिका में अपनी जिंदगी बना चुके थे.
इनपुट: AP
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