सीजफायर पर सहमत होने के बाद US-Iran के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच घंटों की बातचीत फेल हो गई. अमेरिकी उप-राष्ट्रपति ने तो यहां तक कह दिया है कि ये ईरान के लिए बुरी खबर है. एक महीने से ज्यादा चले युद्ध के बाद इस वार्ता को लेकर उम्मीद जागी थी और इसके चलते शेयर बाजारों में भी रौनक लौटी थी और आसमान पर पहुंचे कच्चे तेल की कीमतों में भी अचानक तगड़ी गिरावट देखने को मिली थी.

अब जबकि दोनों देशों की ये वार्ता विफल हो गई है, तो सवाल ये खड़ा हो गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्या करेंगे, क्या कुछ बड़ा होने वाला है और इसका असर सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार से लेकर कच्चे तेल की कीमतों तक पर देखने को मिल सकता है.

‘कुछ भी हो, जीत हमारी है…’
शेयर बाजार में फिर से गिरावट का सिलसिला देखने को मिल सकता है, कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आ सकता है. ये खौफ एक बार फिर से फैलता नजर आ रहा है, क्योंकि भीषण युद्ध के बाद दो हफ्तों के सीजफायर बीच हुई अमेरिका-ईरान वार्ता फेल हो गई है. जहां ईरान ने 21 घंटे चली बातचीत के बाद साफ कह दिया है कि, ‘हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी थीं, अमेरिका ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है.’ तो वहीं एक ब्रीफिंग में अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी बातचीत के बारे में अपडेट देते हुए कहा है कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंचे और ये ‘ईरान के लिए बुरी खबर’ है.

वैंस ने कहा कि, ‘ईरानियों के साथ हमने कई महत्वपूर्ण चर्चाएं की हैं, जो अच्छी बात है, लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुच पाए हैं. मुझे लगता है कि यह अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है.’ उन्होंने आगे कहा कि हम देखेंगे कि क्या होता है, चाहे कुछ भी हो, जीत हमारी ही है.

बाजार के लिए रेड सिग्नल
अमेरिका-ईरान में दो हफ्ते के सीजफायर के बाद आखिरकार लंबे समय बाद शेयर बाजार में रौनक लौटी थी. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते पांच कारोबारी दिनों में बीएसई का सेंसेक्स करीब 4745 अंक की बढ़त में रहा था और एनएसई का निफ्टी 1450 अंक के आसपास बढ़त में रहा. बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को BSE Sensex 918 अंक की उछाल के साथ 77,550 के लेवल पर क्लोज हुआ था, तो वहीं NSE Nifty 275 अंक की तेजी के साथ 24,050 पर बंद हुआ था. लेकिन अमेरिका-ईरान वार्ता फेल होने के बाद अब फिर से बाजार के लिए रेड सिग्नल मिल रहे हैं.

नहीं खुला होर्मुज, तो तेल की टेंशन
US-Iran के बीच बातचीत फेल होने का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट खुलने की उम्मीद पर पड़ता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सीजफायर के बाद भी Hormuz Strait को लेकर ईरान को नई-नई धमकियां देते नजर आ रहे थे. यही नहीं उन्होंने ईरान को हथियारों की सप्लाई करने वाले देशों पर टैरिफ अटैक की चेतावनी भी दे डाली थी.

अब अगर होर्मुज को लेकर टेंशन फिर बढ़ती है, तो फिर बीते कुछ दिनों में गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल पर आए कच्चे तेल के दाम छलांग लगा सकते हैं और नए शिखर पर पहुंच सकते हैं. इसके असर की बात करें, तो पहले से गहराया तेल-गैस संकट तमाम देशों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है और महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है.

गौरतलब है कि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम (Brent Crude Oil Price) 95.20 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. तो वहीं WTI Crude Price भी 96.57 डॉलर प्रति बैरल पर बने हैं. मर्बन क्रूड 98.16 डॉलर पर कारोबार कर रहा है. कुल मिलाकर सभी कैटेगरी के क्रूड की कीमत 100 डॉलर से नीचे बनी हुई है.

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