एसएस राजामौली की फिल्म वाराणसी, इंडियन सिनेमा के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है. बाहुबली और RRR जैसी फिल्मों से राजामौली ने ने सिर्फ तगड़ा कलेक्शन या अवॉर्ड ही नहीं कमाए. उन्होंने इंडियन फिल्ममेकर्स को ये दिखाया कि अपने विजन को पेपर से बड़े पर्दे तक कैसे लाना है.
वाराणसी से राजामौली अब एक कदम आगे जा रहे हैं. अपनी पिछली फिल्मों के लिए कभी यूके कभी कनाडा और जर्मनी की कंपनियों के चक्कर लगा चुके राजामौली, वाराणसी के लिए कई तकनीकें ही भारत ला रहे हैं. इन तकनीकों में ग्लोबल लेवल का नया VFX स्टूडियो, एक नई मोशन कैप्चर फ़ैसिलिटी और डॉल्बी प्रोसेसिंग यूनिट भी शामिल हैं. इस स्टोरी के पहले पार्ट में हमने आपको बताया था कि राजामौली का नया VFX स्टूडियो लाना कैसे इंडियन सिनेमा के लिए फायदेमंद होगा. इस मिशन में राजामौली इंडियन सिनेमा के लिए दो और बड़े टेक्निकल अपग्रेड लेकर आए हैं. चलिए बताते हैं कि इनसे क्या होगा.
यहां पढ़ें पहला पार्ट: विदेश में VFX करवाने के नुकसान और ‘वाराणसी’ की तकनीकी क्रांति!
क्या है मोशन कैप्चर और वाराणसी में कैसे होगा यूज?
बड़े पर्दे पर कंप्यूटर जेनरेटेड (CG) काल्पनिक संसार की कहानी ज्यादातर दो तरह से आती है— संसार CG है और किरदार भी. दूसरा, संसार CG है मगर किरदार रियल इंसान. अवतार 2 फिल्म में ये दोनों सिचुएशन हैं. कहानी के CG संसार में नेतीरी (एक्ट्रेस जोई सल्डाना) CG कैरेक्टर है. मगर स्पाइडर (एक्टर जैक चैंपियन) धरती के नॉर्मल इंसान जैसा किरदार.
VFX के दम पर टिके किसी भी प्रोजेक्ट में मोशन कैप्चर (मो-कैप) का रोल बहुत बड़ा होता है. आपने शायद अवतार फिल्मों के एक्टर्स की, एक खास ब्लैक सूट पहनकर परफॉर्म करते तस्वीरें देखी होंगी. उनके शरीर और चेहरे पर ढेर सारी डॉट्स होती हैं— ये मोशन कैप्चर का हिस्सा होता है. डॉट्स के जरिए एक कैमरा एक्टर्स के मूवमेंट रिकॉर्ड करता है, चेहरे पर बनी डॉट्स से फेस के एक्सप्रेशन रिकॉर्ड होते हैं. इसलिए CG कैरेक्टर होने के बावजूद अवतार में नेतीरी और बाकी एक्टर्स के फेस एक्सप्रेशन एकदम रियल लगते हैं.
मोशन कैप्चर का सीधा फंडा है कि एक्टर्स के मूवमेंट, एक्सप्रेशन जितनी बारीकी से कैप्चर होंगे, फाइनल सीन में उनका CG किरदार उतना ही रियल दिखेगा. लेकिन मोशन कैप्चर से सिर्फ CG कैरेक्टर ही नहीं, रियल इंसानी किरदार को भी CG संसार में शानदार विजुअल्स देता है. क्योंकि आखिरकार वो ह्यूमन कैरेक्टर भी CG संसार के पेड़-पहाड़-प्रकृति या दूसरे CG किरदारों से इंटरेक्शन करता दिखेगा. और मोशन कैप्चर से फिजिकल मोशन स्मूद हो जाता है, जो ग्राफिक्स से बने संसार से मिक्स अच्छा होता है. जैसे अवतार 2 में स्पाइडर के साथ होता है.
राजामौली की वाराणसी का डिजाइन ऐसा ही होने वाला है. फर्स्ट लुक और पोस्टर्स बताते हैं कि प्रियंका, महेश बाबू और बाकी एक्टर्स के किरदार ग्राफिक्स की मदद से स्क्रीन पर बने काल्पनिक संसार में नजर आएंगे. शायद इसमें कुछ किरदार भी CG हों. इसलिए मोशन कैप्चर से विजुअल्स शानदार बनेंगे.
मोशन कैप्चर का शूट भी किसी दूसरे सीन की तरह होता है, बस यहां सेट रियल नहीं होता. हर सीन की तरह इसमें हर फ्रेम में कई एक्टर्स हो सकते हैं, जो एक्शन या ड्रामा के लिए वो आपस में फिजिकली इंटरैक्ट करते हैं. कई सीन्स के लिए कूद-फांद और स्टंट भी होते हैं. मोशन कैप्चर में ये सब जितना फाइन होगा, VFX में उतना ही रियल और बेहतरीन लगेगा. मगर इंडिया के मो-कैप स्टूडियोज में स्केल, बारीकी और एकसाथ मल्टिपल एक्टर्स के साथ काम करने की लिमिटेशन थीं. इसलिए अवेंजर्स जैसे किसी प्रोजेक्ट का मो-कैप यहां संभव नहीं था.
नया मोशन कैप्चर स्टूडियो
बाहुबली के प्रोड्यूसर शोबू येरलागड्डा, राजामौली और राजा कोदुरी ने एक VFX स्टूडियो, मिहिर विजुअल लैब्स की शुरुआत की थी. अन्नपूर्णा स्टूडियो, तेलुगु फिल्म स्टार नागार्जुन का है. इन दोनों कंपनियों ने, मो-कैप की ग्लोबल लीडर कंपनी एनिमेट्रिक फिल्म डिजाइन के साथ मिलकर हैदराबाद में नई फैसिलिटी तैयार की है. एनिमेट्रिक को अवेंजर्स एंडगेम और स्पाइडरमैन 3 जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है. इसी साल राजामौली ने अन्नपूर्णा स्टूडियो, हैदराबाद में ये नई मोशन कैप्चर फैसिलिटी लॉन्च की है.
ये नई मोशन कैप्चर फैसिलिटी 60 फीट लंबी, 40 फीट चौड़ी और 30 फुट ऊंची है. इसमें एक साथ करीब 20 एक्टर्स परफॉर्म कर सकते हैं. यहां मो-कैप के लिए वाइकॉन वैलकरी कैमरा यूज होता है जो बारीक से बारीक बॉडी मूवमेंट कैप्चर कर सकता है. 2000 फ्रेम्स प्रति सेकंड (FPS) तक शूट कर पाने में सक्षम ये कैमरा मोशन कैप्चर में एक्शन शूट करने के लिए सबसे बेस्ट है. जेम्स कैमरून ने अवतार के मोशन कैप्चर के लिए यही यूज किया है.
इसका मतलब ऐसे समझिए— मोबाईल फोन्स में आने वाले सबसे धांसू कैमरे भी अच्छी क्वालिटी में मोस्टली 240 FPS तक ही वीडियो रिकॉर्ड कर पाते हैं. वो भी वीडियो क्वालिटी 4K से 1080 पिक्सल करने पर. कुछ सबसे दमदार फोन ही 4K में 240 FPS तक जाते हैं. क्वालिटी कम भी करते जाएं तो हद से हद मामला 960 FPS तक जाता है!
अन्नपूर्णा स्टूडियो वाली फैसिलिटी को इंडिया की बेस्ट मोशन कैप्चर फैसिलिटी का कहा जा रहा है और राजामौली पहले ही वाराणसी के कई महत्वपूर्ण सीक्वेंस शूट कर चुके हैं. इस फैसिलिटी का लॉन्च करते हुए उन्होंने कहा कि बाहुबली के समय उन्हें इस तकनीक का एक्सेस मिल पाता तो फिल्म का लेवल कुछ और होता!
डॉल्बी प्रोसेसिंग
सिर्फ फिल्ममेकिंग ही नहीं, फिल्म दिखाने की तकनीकें भी बदल रही हैं. आज इंडिया में IMAX फॉर्मैट का क्रेज बहुत तगड़ा हो चुका है. हर बड़ी फिल्म लोग IMAX में देखना चाहते हैं. लेकिन 6 नए थिएटर्स के साथ डॉल्बी सिनेमा भी इंडिया में एंट्री ले चुका है. यहां फिल्में देख चुके लोग डॉल्बी को IMAX से भी आगे की चीज बता रहे हैं. इंटरनेशनल ऑडियंस के सिर इसका क्रेज चढ़ने लगा है. लेकिन जैसे IMAX में दिखाने के लिए पोस्ट-प्रोडक्शन में फिल्म की प्रोसेसिंग अलग होती है, वैसे ही डॉल्बी के लिए भी प्रोसेसिंग अलग होती है.
पिछले साल राजामौली ने अन्नपूर्णा स्टूडियो में ही एक डॉल्बी सर्टिफाइड पोस्ट-प्रोडक्शन फैसिलिटी लॉन्च की थी. लॉन्च के वक्त राजामौली ने बताया था कि RRR को डॉल्बी में प्रोसेस करवाने के लिए उन्हें जर्मनी जाना पड़ा था. ‘मुझे इस बात का बहुत दुख हुआ था कि मैं अपने देश में, अपनी फिल्म डॉल्बी में नहीं देख सकता!’ राजामौली ने कहा था. लेकिन नई डॉल्बी प्रोसेसिंग फैसिलिटी अब उनकी फिल्म वाराणसी ही नहीं, आगे भी कई फिल्मों के काम आएगी.
हर नई तकनीक के भारत में उपलब्ध होने का मतलब होगा कि फिल्ममेकर्स को अपना विजन पर्दे पर लाने के लिए ये चिंता नहीं होगी कि देश में ये तकनीक उपलब्ध ही नहीं है. बाहर जाने पर बजट बहुत बढ़ जाएगा. जैसे डायरेक्टर आदित्य धर ने धुरंधर से पहले अनाउंस अपनी फिल्म अश्वत्थामा इसलिए बंद कर दी क्योंकि इसके लिए जरूरी तकनीक देश में नहीं थी और बाहर काम करने भर का बजट खर्चने के लिए कोई कंपनी तैयार नहीं थी.
बाहुबली के वक्त विदेश में एक सवाल-जवाब सेशन में राजामौली ने कहा था— मेरा लक्ष्य ऐसी इंडियन फिल्म बनाना है जो हॉलीवुड फिल्मों के 20% बजट में बन जाए. पर क्वालिटी में वो कम से कम हॉलीवुड का 90% हो!
सोच के देखिए, अगर ऐसा हुआ तो इंडिया दुनियाभर की फिल्मों के लिए कितना तगड़ा हब बन जाएगा. VFX से लेकर प्रोसेसिंग तक, सब इंटरनेशनल क्वालिटी में लेकिन यूके-यूएस के मुकाबले कहीं कम कीमत में उपलब्ध होगा. इसलिए राजामौली की वाराणसी या नमित मल्होत्रा की रामायण जैसी फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं हैं. इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का प्रचार करने वाला पर्चा भी हैं.
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