चला गया हिंंदी सिनेमा का आखिरी मु्गल… ये कहते हुए आवाज भारी होती है, आंखें नम. आशा ताई ने खुद बताया था जब लता दीदी गई तो मैंने सोचा सब तो चले गए. अब बस मैं ही बचीं हूं. आखिरी मुगल. आज वो आवाज भी शांत हो गई. जानिए इस बात से जुड़ा पूरा किस्सा.
दिग्गज गायिका आशा भोसले का 12 अप्रैल 2026 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया है. वे पिछले कुछ दिन से बीमार चल रही थीं. उन्होंने एक रियलिटी शो के दौरान संगीत के उस सुनहरे दौर को याद किया था, जिसने भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दी थी. उस दौरान वो काफी इमोशनल भी हुईं थीं.
उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के उन दिग्गजों का जिक्र किया जो अब हमारे बीच नहीं रहे. आशा ताई ने बेहद सादगी और गहराई के साथ खुद को फिल्म इंडस्ट्री का ‘आखिरी मुगल’ बताया था. उनका यह बयान न केवल उनके लंबे करियर को दर्शा रहा था बल्कि उस दौर के प्रति उनके सम्मान और अकेलेपन को भी उजागर करता था, जब सुरों की दुनिया में एक से बढ़कर एक महारथी हुआ करते थे.
आशा भोसले ने इंडस्ट्री के उन सुनहरे दिनों को याद करते हुए कहा था कि एक समय था जब म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगरों की एक पूरी फौज हुआ करती थी, जिन्होंने अपनी कला से इस इंडस्ट्री को सींचा. उन्होंने बेहद इमोशनल होकर भारत रत्न दिवंगत लता मंगेशकर की बात को याद किया. जिसमें लता दीदी ने एक बार आशा से कहा था, ‘किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, मुकेश, तलत महमूद, गीता दत्त और शमशाद बेगम जैसे ये सभी एक-एक कर चले गए और अब उस दौर की यादें ही शेष रह गई हैं.’
खुद को बताया आखिरी मुगल
अपनी चर्चा के दौरान आशा भोसले ने एक बहुत ही गहरी बात कही थी. उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले जब उनकी बहन और स्वर कोकिला लता मंगेशकर जीवित थीं, तब उन्होंने कहा था कि ‘अब हम दोनों ही आखिरी मुगल बचे हैं.’ लेकिन अब लता दीदी के चले जाने के बाद आशा ताई ने खुद को उस महान संगीत युग का अंतिम मुगल बताया था. ‘आखिरी मुगल’ शब्द का इस्तेमाल उन्होंने उस दौर और अब उसके खत्म होने के प्रतीक के रूप में किया, जिसकी वह खुद एक चश्मदीद गवाह और अहम हिस्सा रही हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी हुआ जिक्र
हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब आशा भोसले ने खुद को आखिरी मुगल बताया हो. इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशा भोसले ने कहा था, ‘फिल्म इंडस्ट्री का इतिहास सिर्फ मैं ही जानती हूं. डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, आर्टिस्ट्स, सिंगर्स, सभी की इतनी सारी कहानियां हैं कि अगर मैं इसके बारे में बात करना शुरू करूं तो मुझे 3-4 दिन लग जाएंगे… मैं कुछ भी नहीं भूली हूं. मैं इस फिल्म लाइन की आखिरी मुगल हूं.’
40 के दशक में शुरू हुआ सफर
आशा भोसले ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने साल 1943 में अपना पहला गाना गाया था. तब से लेकर आज तक, यानी आठ दशकों से भी ज्यादा समय से वह लगातार गा रही हूं. उन्होंने संगीत की दुनिया में आए हर बदलाव को देखा है—चाहे वह रिकॉर्डिंग के तरीके हों या संगीत की शैली. 40 के दशक से शुरू हुआ उनका यह सफर अंतिम दिनों तक जारी था.
संगीत की एक महान विरासत
आशा ताई की बातों ने वहां मौजूद सभी लोगों को इमोशनल कर दिया था. उनका यह ‘आखिरी मुगल’ वाला बयान संगीत प्रेमियों के लिए एक युग के अंत जैसा महसूस होता है, लेकिन उनकी आवाज हमेशा अमर रहेगी.
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